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Wednesday, September 26, 2018

पड़ोसन भाभी को चोदा


कुछ समय पहले हमारे पड़ोस में एक शादीशुदा जोड़ा रहने के लिए आया था उनकी एक लड़की थी। उन्होंने वहां पर एक बहुत ही अच्छा मकान बनाया हुआ था। मैं उनके पिछली वाली गली को छोड़कर दूसरे मकान में रहता हूं। मेरा नाम आनंद है। जब वह यहां रहने के लिए आए थे उसके 2 साल बाद उनके पति का देहांत हो गया था। अब वह वहां अकेली पड़ गई थी। हम भी वहां उनका दुख दर्द बांटने गए थे। हमने उनसे पूछा यह कैसे हुआ उस समय वह बहुत तकलीफ में थ कि जैसे उनका सब कुछ खो गया हो। उनका नाम वैभवी था। यह देखकर हमें बहुत बुरा लगा। हम कभी भी उनकी मदद करने के लिए तैयार रहते। अगर उन्हें किसी चीज की जरूरत पड़ती है तो वह हमें ही कहती है हमारी जान पहचान उसी टाइम हुई थी। जब उनके पति का देहांत हुआ था।
एक दिन मेरे दोस्त को किराए पर घर चाहिए था तो मैंने सोचा क्यों ना वैभवी से जाकर घर के बारे में पता करके आऊं। मैंने उनसे घर के बारे में बात की और उनसे कहा कि अगर वहां पर कोई रहेगा, तो उनके लिए चिंता की बात नहीं होगी और घर का थोड़ा बहुत खर्चा भी उन पैसों से निकल जाएगा। पहले तो वह मना कर रही थी क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं था कि जो नया किराएदार आएगा वह कैसा होगा और मैंने उन्हें विश्वास दिलाया।

दूसरे दिन वह मान गई थी कुछ दिनों बाद वह नया किराएदार आया और उनके घर में शिफ्ट हो गया। वैभवी अपना घर का खर्चा चलाने के लिए कुछ काम ढूंढ रही थी लेकिन उसकी एक बेटी भी थी। उसे भी तो संभालना था वैभवी सुबह अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने जाती थी और फिर लेने के लिए जाती थी। जब तक उसकी बेटी स्कूल में रहती है उसको तब तक के लिए कुछ काम चाहिए था। मैंने उन्हें एक सलाह दी मैंने उनसे एक बुटीक खोलने को कहा। अगर वह अपने घर पर ही बुटीक खोल लेंगे तो उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और घर पर ही अपनी बेटी को भी देख लेंगे और अपना काम भी संभाल लेंगी। ऐसे में उनका समय भी बचेगा और बेटी का भी अच्छे से ध्यान भी रख पाएंगे। मैंने उन्हें इस बारे में सोचने के लिए कहा वह बुटीक खोलने के लिए तैयार हो गई लेकिन उन्हें थोड़ी खर्चे की आवश्यकता थी। मैंने उनकी मदद करनी चाहिए लेकिन उन्होंने मना किया। मैंने उनसे कहा कि अभी तुम मेरी मदद ले लो बाद में जब तुम्हारे पास पैसे आ जाएंगे तो मुझे वापस लौटा देना मेरे यह सब कहने के बाद तब जाकर उन्होंने मेरी मदद ली। कुछ दिन बाद उन्होंने एक बुटीक खोल लिया।
बुटीक खोलने में मैंने भी उनकी काफी मदद की क्योंकि उनको मदद की आवश्यकता थी। एक पड़ोसी होने के नाते मैंने यह सब किया। बुटीक खोलने के अगले दिन से वह अपनी बेटी को छोड़ने स्कूल जाती और फिर घर आकर अपने बुटीक का काम करने लगती। काम खत्म करके अपनी बेटी को लेने जाती फिर दोनों घर आकर खाना खाते और थोड़ी देर आराम करते उसके बाद उनकी बच्ची खेलने के लिए चली जाती। वैभवी अपना बुटीक का काम फिर से करने लगती थी जब उनकी बच्ची घर आ जाती तो वह थोड़ा समय उसको पढ़ाने में देती। फिर उसके बाद तक ना खाना बनाने का काम करके दोनों खाना खाते और कभी-कभी वह बच्ची अपने पापा को भी याद करती वह कहती कि मेरे पापा कहां है वह कब आएंगे। वैभवी को इस बात का बड़ा दुख होता था। वह कहती कि तुम्हारे पापा जल्दी आ जाएंगे तुम सो जाओ। उन्हें ऐसा लगता था कि उनकी बच्ची को पापा की कमी महसूस हो रही है लेकिन वह बेचारी भी क्या करती। कुछ समय बाद उनका बुटीक का काम और भी अच्छा चलने लगा और उनके खर्चे भी कम होने लगे क्योंकि बुटीक का काम चलने के कारण उनके पास थोड़ा बहुत पैसे आने लगे थे और थोड़ा किराए के पैसे आ ही रहे थे। वह और मेहनत करती और पैसे कमाती ताकि वह अपनी बच्ची का भविष्य अच्छे से संवार सके और उसे पढ़ा लिखा कर एक अच्छी एजुकेशन दे सके। वह अपनी बच्ची की हर इच्छा पूरी करने को तैयार रहती थी। वह अपनी बेटी से बहुत प्यार करती थी दोनों मां और बेटी एक दिन पिकनिक पर जा रहे थे। उस समय वैभव की बेटी की स्कूल की छुट्टियां पड़ी हुई थी इसलिए वह घूमने जा रहे थे। शाम को वैभवी मुझे मिली और मुझे भी पिकनिक पर चलने के लिए कहा मैं उनके साथ जाने के लिए तैयार हो गया। हम एक अच्छे दोस्त की तरह रहते थे हम तीनों ने वहां खूब इंजॉय किया वैभव की बेटी बहुत ही सुंदर थी मुझे वह बड़ी ही प्यारी लगती थी।
हम सब पिकनिक पर गए तो मैंने उससे पूछा कि तुम्हें तुम्हारे पति की कमी कभी महसूस नहीं होती। वह कहने लगी मुझे बहुत महसूस होती है और मेरा मन भी करता है कि कभी मैं सेक्स करूं लेकिन ऐसा हो ही नहीं पा रहा है। मैंने वैभवी को कहा कि मैं तुम्हारी इच्छा पूरी कर दूंगा तुम चिंता मत करो। जैसे यह बात मैंने कही तो वह झट से मेरी बाहों में आ गई और बहुत ही खुश हो गई और कहने लगी क्या तुम वाकई में मेरी इच्छा पूरी करोगे। मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत मारूंगा अब उसकी बच्ची सो चुकी थी और काफी रात भी हो गई थी। मैंने पहले तो ऐसे ही आराम से उसके स्तनों पर हाथ फेरना शुरू किया। अब उसके स्तनों को मैं बहुत तेज दबा रहा था और थोड़े समय बाद उसकी योनि को भी दबाने लगा। जैसे ही मैंने उसकी योनि को दबाया तो वह मुझे कहती  तुम बहुत ही अच्छे से मेरे स्तनों को और योनि को दबा रहे हो। मैंने उसके ब्लाउज के बटन को खोलते हुए उसकी  ब्रा को भी खोल दिया। उसके स्तनों के मे चाटने लगा जैसे मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में लेता उसकी आवाज निकाल जाती। उसे डर था कि कहीं उसकी बेटी उठ ना जाए। मैंने उसकी साड़ी को उठाते हुए उसकी चूत को चाटना शुरू किया। जैसे ही मैं उसकी चूत को चाट रहा था तो उसका पानी बड़ी तेजी से निकल रहा था और मैं उस पानी को पूरा चाट जाता था। कुछ देर में मैंने भी अपने लंड को वैभवी से चुसाना शुरू किया।
वह बड़े अच्छे से मेरे लंड को चुसती जाती और अपने पूरे मुंह के अंदर तक लेती। ऐसा उसने काफी देर तक किया और जब उसने अपने मुंह से मेरा लंड बाहर निकाला तो मेरा लंड एकदम लाल हो चुका था। मैने उसके होठों को स्मूच करना शुरू किया। जैसे ही मैं उसके होठों को स्मूच करता तो वह मदहोश हो जाती और मेरी बाहों में आ जाती। मैंने उसकी  साड़ी को उठाते हुए दोनों पैरों को खोल दिया और अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया जैसे ही मैंने उसकी चूत मे लंड डाला तो उसकी चीख निकल पड़ी। लेकिन मैंने झट से उसके मुंह पर किस करना शुरू कर दिया। जिससे उसकी चिख ना निकल सके लेकिन वह भी बहुत तेज चिल्ला रही थी और मै उसके होठों को चुसता जाता।
मुझे इस बात का डर था कि उसकी बच्ची ना उठ जाए। मै ऐसे ही धक्के मारता जाता तो उसका पानी बड़ी तेजी से गिर रहा था और मैं बड़ी तेजी से धक्के मारे जा रहा था। मुझे बहुत आनंद आ रहा था। मैं उसके स्तनों को भी अपने मुंह में लेकर चुसता और उन्हें दबाता जाता। मैंने अपनी उंगली उसके मुंह में डाल दी और वह मेरी उंगली को भी अपने मुंह से अंदर तक ले लेती और फिर बाहर निकालने लगती। अब उसने अपने पैरों से मुझे बहुत तेज जकड़ लिया था। जिससे कि मैं उसे चोद  भी नहीं पा रहा था लेकिन मैं झटके मारे जा रहा था। मैं ऐसे ही उसे झटके मारता रहा करीबन ऐसे करते हुए मुझे 10 मिनट से ऊपर हो चुके थे, लेकिन मेरा झड भी नहीं रहा था। उसके साथ ऐसा लग रहा था कि मानो मेरा मन ही नहीं भर रहा हो। मै वैसे ही बड़ी तेजी से अभी झटके मारे जा रहा था  आप मेरा चरम सीमा पर था जैसे ही मेरा वीर्य पतन होने वाला था तो मैंने भी उसकी योनि में सारा वीर्य गिरा दिया।
जैसे ही मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो वह मुझसे चिपक गई और मेरे गले मिलने लगी। मुझे कहने लगी तुमने मेरी आज इच्छा पूरी कर दी है मैं बहुत दिनों से भूखी बैठी हुई थी कि कौन मेरी इच्छा पूरी करेगा। उसके बाद से मेरा उसके घर कुछ ज्यादा ही आना-जाना लगा रहा और वह भी मुझे अपने पति की तरह ही समझती थी।

स्कूल टीचर को पहली बार चोदा


मेरा नाम प्रशांत है मैं बारहवीं में पढ़ता हूं और इटावा का रहने वाला हूं। हमारे स्कूल में एक बार एक नई टीचर आई वह बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी जितनी वह सुंदर थी उतनी ही वह इंटेलिजेंट थी। वह हर क्वेश्चन का आंसर मिनटों में देती थी और वह हमें भी पढ़ाती थी। जब वह पहली बार हमारी क्लास में आई तो उसने सब बच्चों के नाम पूछे और फिर लास्ट में हमारी टीचर ने अपना नाम बताया उनका नाम मीरा था। मैं अपने स्कूल में टॉप करता था और हमारी मीरा टीचर भी मुझे अपना सबसे अच्छा स्टूडेंट मानती थी। वह हर सब्जेक्ट में मेरी मदद करती थी एग्जाम के टाइम वह मुझे अपने घर बुलाती थी और मुझे ट्यूशन के तौर पर पढ़ाती भी थी। उन्होंने मेरी एग्जाम के समय बहुत मदद की मुझे मेरी टीचर बहुत अच्छी लगती थी। मेरा तो उन पर उसी दिन दिल आ गया था जब वह पहली बार हमारी क्लास में आई थी। मैं हमेशा उनके पास ट्यूशन के लिए जाता था। ट्यूशन पढ़ाने के लिए मैंने ही अपनी टीचर से कहा था। पहले तो उन्होंने मना किया लेकिन मेरे काफी कहने के बाद वह मान भी गई थी। उसके बाद मेरे साथ साथ और बच्चे भी उनके पास ट्यूशन जाने लगे थे।
मैं हमेशा अपनी टीचर के बगल में ही बैठता था और जब सब बच्चे घर चले जाते थे। मैं उसके कई देर बाद घर जाता था मैं उन्हीं के साथ समय बिताता और उनकी कभी कबार घर के कामों में भी मदद करता था। एक दिन मैंने अपनी टीचर को अपने घर बुलाया और अपने मम्मी पापा से मिलाया। मैंने उन्हें अपने घर डिनर पर बुलाया था। मेरे मम्मी पापा मेरी टीचर से मेरे बारे में पूछते की प्रशांत पढ़ने में कैसा है। वह स्कूल में पढ़ाई करता है भी है या नहीं फिर टीचर ने मेरी खूब तारीफ की मेरी टीचर कहने लगी कि प्रशांत स्कूल का सबसे बेस्ट स्टूडेंट है। उसका ध्यान पढ़ाई पर ही रहता है और ट्यूशन में भी वह पढ़ाई पर ध्यान देने के साथ साथ कभी कबार मेरे साथ काम भी कर लिया करता है।
एक दिन स्कूल में टीचर पढ़ा रही थी और मैं उन्हें ही देखे जा रहा था। मेरी नजर तो उनसे हटती ही नहीं थी और एक बार जब टीचर हमें पढ़ा रही थी। तब अचानक हमारी क्लास में एक लड़का फूलों का गुलदस्ता लेकर आया। मैंने उसे देखा और सोचने लगा कि यह कौन है और यहां क्या कर रहा है। उसने वह फूलों का गुलदस्ता टीचर को दिया और उनके गले लगा। मुझे यह सब देखकर बहुत गुस्सा आया मेरी टीचर उसके साथ हंस-हंस के बातें कर रही थी। थोड़ी देर बाद हमारा लंच हुआ सभी बच्चे लंच करने लगे और मेरी टीचर बाहर जाकर उसके साथ कैंटीन में बैठ गई। थोड़ी देर बाद मैं उनके पीछे गया तो वह दोनों हाथ पकड़े हुए थे और वहां बैठकर कॉफी पी रहे थे। मुझसे यह सब देखा नहीं गया जब उन्होंने हाथ पकड़े थे तो मैं वहां गया उनके सामने खड़ा हो गया। मेरी टीचर ने मुझे देखा और कहा कि तुम यहां क्या कर रहे हो तुमने लंच किया कि नहीं मैंने कहा हां कर लिया। फिर उन्होंने मुझे बैठने के लिए कहा मैं उनके बगल में बैठ गया फिर दोनों के दोनों बातें कर रहे थे। मुझे यह सब बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। भले ही मेरी टीचर मुझसे उम्र में बड़ी हो लेकिन फिर भी मुझे वह बहुत अच्छी लगती थी।
अब हमारा लंच टाइम खत्म हो चुका था और मेरी टीचर ने मुझे कहा कि तुम अपनी क्लास में जाओ। मैंने कहा ठीक है मैं अपनी क्लास में जाता हूं। उस दिन मैंने अच्छे से पढ़ाई भी नहीं की और जब मैं घर गया तो मैं सीधा ही ट्यूशन पढ़ने के लिए मेरा मैडम के पास चला गया। मैं जैसे ही वहां गया तो मैंने देखा कि उनका बॉयफ्रेंड उनके साथ किस कर रहा है वह उनका दूध पी रहा है। जो मै चुपके से देखता जा रहा था मेरा भी लंड खड़ा हो रहा था। मैंने उनके बदन को देखा तो वह बहुत ज्यादा सुंदर लग रही थी और उनका बदन तो एकदम हॉट लग रहा था। उनके स्तन बड़े बड़े थे और उनकी गांड भी काफी बाहर निकली हुई थी। उनका बॉयफ्रेंड उन्हें अच्छे से चोद रहा था। कभी वह उन्हें अपने नीचे चोदता तो कभी उन्हें अपनी गोद में उठा लेता। वह वैसे ही उनके साथ सेक्स कर रहा था। मेरा तो यह सब देखकर मूड खराब हो गया और मैं तुरंत ही बाथरुम में गया वहीं मैंने मुट्ठ मार दी तब जाकर मेरे मन में थोड़ा शांति हुई। वह भी अपने बॉयफ्रेंड से चुदवाकर आ गई थी और मेरे सामने बैठ गई।
उस दिन मैंने कुछ नहीं बोला चुपचाप पढ़ाई की और सीधा ही अपने घर चला गया। अगले दिन जब वह मुझे स्कूल में मिली तो मैंने उनसे पूछा कि आपका बॉयफ्रेंड जा चुका है तो उन्होंने कहा हां वह जा चुका है। जब हमारा स्कूल खत्म हुआ तो मै मैडम के घर पर ट्यूशन पढ़ने गया तो आज मैंने उनसे पूछ लिया कि कल वह आपके बॉयफ्रेंड के साथ आपके रुम में क्या कर रही थी। आप बहुत अच्छे से उसे अपनी चूत मरवा रही थी मैंने सब देख लिया था। यह सुनकर बहुत एकदम से शॉक्ड हो गई वह मुझे कहने लगी कि तुम किसी को बता मत देना। मैंने कहा मैं किसी को नहीं बताऊंगा लेकिन मुझे आपसे प्यार हो गया है और आप को चोदना भी है। वह यह सुनकर बहुत  शॉक्ड हो गई थी और मुझे कहने लगी तुम अभी बहुत छोटे हो। मैंने कहा मैं छोटा नहीं हूं मेरा लंड बहुत ही बड़ा है आप उसकी चिंता मत कीजिए आपको पूरी संतुष्टि होगी। यह कहते हुए मैंने  अपनी टीचर को मना लिया।
जैसी ही अब हम उनके बेडरूम में गए तो उन्होंने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए और जैसे ही उन्होंने मेरे लंड बाहर निकाला तो वह देखकर डर गई। जब उन्होंने मेरा मोटा और शक लंड अपने हाथ में लिया तो वह कहने लगी तुम्हारा तो बहुत ही मोटा और कड़क है। मैंने कहा हां यह आपके नाम की मुट्ठ मार मार कर मोटा हो गया है। उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ में लेते हुए अपने मुंह में चूसना शुरू किया। जैसे ही उन्होंने अपने मुंह के अंदर डाला तो मुझे काफी अच्छा लगा और मैं ऐसे ही उन्हें झटके मारे जा रहा था। मैंने उनके मुंह के अंदर ही अपने माल को गिरा दिया। उन्होंने मेरे लंड को बहुत ही अच्छे से चूसा जिस से मेरा लंड पूरे लाल हो गया था। अब दोबारा से उन्होंने मेरे लंड को चूसना शुरू किया और वह दोबारा से खड़ा हो गया। मैंने उनके गोरे बदन को चाटना शुरु किया और उनके पूरे बदन को मैंने अच्छे से अपनी जीभ से चाटा। फिर कुछ देर बाद मैंने उनके स्तनों को अपने मुंह में लेना शुरू किया। उनके स्तन मैंने अपने मुंह में ले लिए और उनके निप्पल को अच्छे से चूस रहा था। जिससे कि उनका शरीर एकदम गरम हो गया और मुझे भी गर्मी चढ़ गई। उनका शरीर पूरा लाल होने लगा था और मेरे शरीर में एकदम आग लग गई थी। ऐसे ही मैंने उनकी गांड को कसकर पकड़ लिया और उनकी योनि में भी अपनी जीभ से चाटने लगा। मैंने बहुत ही अच्छे से जीभ से उनकी योनि को चाटा। उनकी  योनि गीली हो चुकी थी और मैंने अपने लंड को उनकी योनि में डाल दिया। जैसे ही मैंने अपने मोटे लंड को उनकी योनि में डाला तो वह बहुत जोर से चिल्ला उठी। मेरा लंड अंदर तक घुसा चुका था वह झटपटाने लगी और मस्त हो गई। मैंने उनके दोनों पैरों को कसकर पकड़ा और अपने कंधे पर रखते हुए धक्का मारना शुरू किया। मै जैसे ही उन्हें बड़ी तेजी से धक्के मारते जाता और उनके स्तनों को अपने हाथों से दबा रहा था। मैंने उनके होंठों को अपने मुंह में लेकर स्मूच करना शुरू किया। मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब मैडम के पतले होठों को अपने होठों से मिलाया। मै ऐसे ही झटके मारे जा रहा था काफी देर तक मैंने ऐसे ही बड़ी तेजी से झटके मारते मारते उनके पूरे शरीर को हिला दिया था। अब मैंने उन्हें उठाकर अपने ऊपर लेटा दिया और उनके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और मैं नीचे से धक्के मारने लगा। कुछ देर बाद उनके चूत मे मस्ती चढ़ गई और उन्होंने भी अपने चूतडो को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया वह बड़ी तेजी से अपने चूतडो को मेरे लंड के ऊपर नीचे करती जाती और मेरा लंड और उनकी चूत से जो गर्मी निकल रही थी। उसे मेरे लंड बर्दाश्त के बाहर हो गया था और मैंने ऐसे ही उनकी चूत मे अपनी पिचकारी से वीर्य गिरा दिया। जिसे मुझे बहुत अच्छा लगा और वह भी बहुत खुश हुई। जब भी मैं ट्यूशन के लिए जाता तो पहले उनकी चूत मारता उसके बाद पढ़ाई करता।

कॉलेज में मैडम की चूत मारी


मेरा नाम अभिमन्यु है मैं गुजरात का रहने वाला हूं। मेरे परिवार में मेरी मम्मी पापा और मेरा एक भाई है। मैं एमबीए की पढ़ाई कर रहा हूं। मेरे पापा एक बिजनेसमैन है हम सब लोग गुजरात में ही रहते हैं मेरी पढ़ाई भी शुरू से गुजरात में ही हुई। मेरे पापा हमेशा मुझ पर अपनी बातें थोपते रहते हैं। वह कभी यह नहीं सोचते कि मैं क्या चाहता हूं वह मुझसे एमबीए तो करा रहे हैं लेकिन वह मुझे अपने बिजनेस की तरफ मोड़ रहे हैं। वह हर समय मुझसे अपने बिजनेस की बातें करते रहते हैं लेकिन एमबीए करके मुझे उनके साथ बिजनेस नहीं करना है। बल्कि एक डॉक्टर बनना है लेकिन उन्हें ऐसा लगता है कि मैं उनकी तरह एक सक्सेसफुल बिजनेसमैन  बनू। मैं उनकी इन बातों से तंग आ चुका हूं लेकिन वह किसी की भी नहीं सुनते। मैंने अपने पापा से एक दिन कहा कि मुझे इस शहर से एमबीए नहीं करना है। मुझे दूसरे शहर से एमबीए करना है लेकिन उन्होंने मुझे दूसरे शहर जाने की अनुमति नहीं दी और कहा कि एमबीए करना है तो यहीं इसी शहर में हमारे साथ रहकर करो नहीं तो कल से मेरे साथ मेरे बिजनेस में हाथ बटाओ।
मैंने अपनी मां से भी इस बारे में कई बार बात की है कि पापा से कहा करें कि मुझसे अपने बिजनेस की बातें ना करें। मुझे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना है और अपनी पढ़ाई पूरी करके एक डॉक्टर बनना है और मुझे अपना खुद का एक हॉस्पिटल खोलना है। जिसमें मैं गरीब लोगों का कम से कम फीस जमें इलाज कर सकूं बस मेरा यही सपना है और यह सपना तब तक पूरा नहीं होगा जब तक पापा मुझे सपोर्ट नहीं करेंगे। हमेशा की तरह आज भी मैं कॉलेज गया हमारे कॉलेज में एक फंक्शन था। उसमें कॉलेज की सभी बच्चे पार्टिसिपेट कर रहे थे। मेरे सर ने मुझसे भी कहा तो मैं भी इस फंक्शन में पार्टिसिपेट करने को तैयार हो गया। हमारे कॉलेज में एक नई  मैम आई थी। उन्होंने ही हमारे इस फंक्शन की तैयारी की थी। इस फंक्शन के दौरान हम सब ने बहुत मेहनत की और जिस दिन वह फंक्शन था उस दिन मेरे पापा भी इस फंक्शन में आए हुए थे।

उस फंक्शन में हम लोगों ने एक नाटक किया। जिसमें मैं एक डॉक्टर की भूमिका में था और वह काफी अच्छा रहा सब लोगों ने हमारी बहुत तारीफ की और मैं इस बात से बहुत खुश था। हमारे नाटक की सब लोगों ने तारीफ की यह मेरे लिए एक गर्व की बात थी। जब मैं घर पहुंचा तो मेरे पिताजी इस बात से बिल्कुल भी खुश नहीं थे। वह यही कहने लगे कि तुम्हें क्या डॉक्टर बनना इस इतना पसंद है कि तुम जब भी देखो तो सिर्फ डॉक्टरी की बात करते रहते हो। मैं तुम्हें एक अच्छी लाइफ देना चाहता हूं मैं नहीं चाहता कि तुम डॉक्टर बनकर तो अपनी नई जिंदगी शुरू करो। मैंने अपने बिजनेस मे इतनी मेहनत की है इसी को तुम आगे बढ़ाओ तो तुम्हारे लिए ज्यादा अच्छा रहेगा। बजाय किसी नए काम को शुरू करने के मुझे भी यह बात थोड़ी अजीब लगी। मैं भी अपना सपना पाले हुए था लेकिन मुझे अब लग गया था कि शायद यह पूरा होने वाला नहीं है इसलिए इस बात के लिए लड़ झगड़ कर कोई फायदा नहीं है। चुपचाप से अपना बिजनेस का ही काम करना पड़ेगा। मैंने अब सोच लिया था कि मैं अपने पापा के बिजनेस में हाथ बटाते हुए ही गरीब बच्चों की सहायता करूंगा। उनकी मदद के लिए जितना मुझसे बन पड़ेगा वह सब मैं इस तरीके से ही करूंगा और सामाजिक कार्य में अपने आप को लोगों से जोड़कर रखूंगा।
जब अगले दिन मैं कॉलेज गया। मेरी वही मैडम मुझसे बहुत खुश हुई और बहुत इंप्रेस हुई। वह कहने लगी कि तुमने कल का प्रोग्राम बहुत अच्छा किया। तुमने डॉक्टर की भूमिका बखूबी निभाई और उसमें अपने काम को अच्छे से किया। मैंने उन्हें बताया कि मैं डॉक्टर ही बनना चाहता था लेकिन मेरे पिताजी की जीद की वजह से मुझे यहां पर एडमिशन लेना पड़ा। मेरे पिताजी का बिज़नेस है उसी को वह चाहते हैं कि मैं आगे बढू। मैंने भी अपना इरदा बदल दिया है कोई डॉक्टर बनने का क्योंकि यह सिर्फ मेरा सपना ही बनकर रह जाएगा। मैं अब पढ़ाई पूरी करने के बाद समाज में जितने गरीब लोग हैं उनकी सहायता करना चाहता हूं। इस बात से मैडम बहुत खुश हुई और वो कहने लगी कि जब कभी मेरी जरूरत पड़े तो तुम मुझे बता देना।
कुछ दिनों बाद मुझे कुछ गरीब बच्चों का एडमिशन स्कूल में करवाना था। तो उसी की हेल्प लेने के लिए मैं उन मैडम के पास चला गया और मैडम का नाम आशा है। जैसे ही मैं उनके ऑफिस में गया तो वह बहुत ही ज्यादा सुंदर लग रही थी। आज वह पहली बार  सूट पहनकर कॉलेज आई थी नहीं तो वो अमूमन साड़ी में ही कॉलेज आती थी। मुझे यह देख कर बहुत अच्छा लगा और अंदर से एक सेक्स की भावना जागृत होती। मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं उन्हें वहीं लेटा कर चोदना शुरू कर दू। लेकिन ऐसा संभव नहीं था क्योंकि वह मेरी टीचर थी। अब मैं उनके पास जाकर बैठ गया और उनसे मैंने इस बारे में डिस्कशन करना शुरू कर दिया कि मुझे कुछ बच्चों का एडमिशन स्कूल में करवाना है। मैने  उन्हें कहा आपके परिचय में कोई इस तरीके से स्कूल है जो थोड़ा कम फीस में उन बच्चों को अपने यहां पर रख सके। बात करते-करते उनके स्तन मुझ से टकराने लगे अब वह भी उत्तेजित होने लगी थी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब उनके स्तन मेरे हाथों से टकराते।
उनके स्तनों का साइज बहुत बड़ा था मै भी उत्तेजित होता और उनके अंदर से भी सेक्स की भावना जागृत हो गई थी। उन्होंने ने मेरे जांघो पर हाथ रख दिया और धीरे-धीरे वह मेरे लंड तक अपने हाथ को ले आई। जैसे ही उनका हाथ मेरे लंड पर लगा तो मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया। मैंने भी उनकी जांघो पर अपने हाथ को रख दिया और उनकी चूत को बड़ी तेजी से दबा दिया। उन्होंने भी मेरे लंड को बहुत जोर से दबा दिया और हम दोनों की चीखें निकल पडी। मैडम भी तैयार हो चुकी थी तो मैने उन्हे वही उनके सोफे में लेटाते हुए उनके कपड़े खोल दिए। जैसे ही मैडम के कपड़े खोले तो मैंने देखा कि उन्होंने मेहरून कलर की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी। यह सब देखकर मै बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया। उनके स्तन बहुत ही ज्यादा बड़े थे और उनकी गांड का साइज़ भी कुछ ज्यादा ही बडा था। मैंने उनकी ब्रा को ऊपर उठाते हुए उनके चूचो को अपने मुंह में लेना शुरू किया और ऐसे ही चूसता रहा। जैसे ही मैं उनके स्तनों को चूसता जाता तो उनके दूध को भी अपने मुंह में ले लेता। वो मुझे कसकर पकड़ लेते और मेरे पूरे शरीर को दबा देते।
मैंने उनकी पूरे शरीर को चाटना शुरु किया और उनकी योनि को भी चाटने लगा। वह बहुत ज्यादा चिल्लाने लगी मैंने भी जल्दी से अपने लंड को गीली चूत पर लगाते हुए अंदर जड़ तक घुसा दिया। जैसे ही मैंने उनकी योनि के अंदर लंड डाला तो उनकी चीखें निकल उठी और वह कहने लगी तुम्हारा तो वाकई में बहुत बड़ा है। मैंने उन्हें कहा थैंक यू मैडम अब मैं ऐसे ही उन्हें झटके मारने लगा। मैं उन्हें काफी तीव्र गति से झटके मार रहा था जिसे उनके चूचे हिल रहे थे और मै उन्हें अपने मुंह में लेकर चूसता जाता। मुझे बहुत अच्छा लगता जब मै उनके स्तनों से दूध को निकालकर अपने मुंह में लेता। उन्होंने अपने पैरों से जकड़ना शुरू कर दिया मुझे समझ आ गया था कि मैडम भी उत्तेजित हो रही हैं। मैं ऐसे ही तेज तेज झटके मार रहा था। मुझे अच्छा लग रहा था क्योंकि मैं अपनी मैडम को चोद रहा था। यह मेरे लिए एक गर्व की बात थी। मैंने उन्हें बहुत देर तक ऐसे ही चोदना जारी रखा और मेरा वीर्य झड़ने को हो गया। मैंने अपने माल को मैडम की टाइट योनि में डाल दिया। अब मैं ऐसे ही उनके ऊपर काफी देर तक लेटा रहा। उन्होंने भी अपने दोनों हाथों से मुझे कसकर पकड़ रखा था। अब मेरा लंड छोटा होने लगा था और मैंने बाहर निकाला तो उनकी चूत से वीर्य टपक रहा था। मुझे उनके साथ संभोग करके बहुत अच्छा लगा।
हम लोगों ने वही एडमिशन की बात शुरू कर दी उन्होंने मुझे बताया कि उनके एक मित्र हैं। उनका स्कूल है वहां बच्चों का एडमिशन करवा दूंगी। मैं उन्हें  थैंक यू कहते हुए उनके ऑफिस से चला गया। उसके बाद से मैं उन्हें हमेशा ही चोदता रहता हूं। जिससे कि कॉलेज में अब मेरा मन भी लगता है और मेरी पढ़ाई भी पूरी हो चुकी है।

मेरी टाइट चूत से कई साल बाद भी खून निकला


मेरा नाम पारुल है और मेरी उम्र 28 वर्ष है लेकिन मेरे घर में कोई भी मुझसे अच्छे से बात नहीं करता है। मेरे भाई भी मुझसे अच्छे से बात नही करते और ना ही मेरे माता-पिता। क्योंकि मैं एक आदर्श लड़की हूं और वह चाहते हैं कि मेरी शादी जल्दी से जल्दी हो जाए लेकिन मेरी शादी कहीं भी नहीं हो रही है। जब भी कोई लड़का मुझे देखने के लिए हमारे घर पर आता है तो वह साफ मना कर देते हैं। इस वजह से मेरे घर में कोई भी मुझसे अच्छे से बात नहीं करता है और मैं अपने कमरे में ही रहती हूं। मैं भी ज्यादा किसी से बात नही करती। मैं जब भी बाहर कहीं जाती हूं तो वहां पर भी मुझे इन बातों का सामना करना पड़ता है। यदि कोई रिश्तेदार हमारे घर पर आ जाते हैं तो उस समय मेरी खैर नहीं। वह सब मुझे इतनी बद्दुआएं देते रहते हैं कि कई बार तो मेरा मन बहुत ज्यादा खराब हो जाता है और मुझे अपने आप पर बहुत ही ज्यादा गुस्सा भी आता है लेकिन फिर भी मैं कुछ नहीं कर सकती।
मैं सोचती रहती हूं कि किस तरीके से मैं अपने आपको थोड़ा अच्छे से मेंटेन कर पाऊं लेकिन मुझसे होता ही नहीं है। मैं अपने घर में ही रहती हूं और जब मेरे दोस्त मेरे घर पर आते हैं तो वह अपने बॉयफ्रेंड के बारे में बताते हैं। या फिर अपने पति के बारे में बताते है। मुझे भी कभी कबार लगता है कि मुझे भी किसी के बारे में उन्हें बताना चाहिए लेकिन ना तो मेरा कोई बॉयफ्रेंड है और ना ही मेरी शादी की बात कहीं चल रही है। इस वजह से मैं उनके सामने भी अपने आप को बहुत ज्यादा शर्मिंदगी भरा महसूस करती हूं। इसी वजह से ना तो मेरा कोई स्कूल में अच्छा दोस्त था और ना ही मेरे कॉलेज में भी कोई अच्छा दोस्त था जिसे मैं अपने बारे में सब बता पाऊं। मुझे भी कभी लगता है कि मैं किसी से बात करूं या फिर कोई मुझे समझ पाए लेकिन कोई भी मुझे समझने को तैयार नहीं है। मेरी मां मुझे बहुत ज्यादा ताने देने लगी थी। अब मैं उससे बहुत परेशान हो गई। मैंने सोचा कि मैं अब कहीं जॉब कर लेती हूं। यदि घर में रहूंगी तो मुझे बहुत ज्यादा परेशानी हो जाएगी।

इस वजह से मैंने एक जगह नौकरी करनी शुरू कर दी। जब मैं वहां नौकरी कर रही थी तो तब भी मुझे अपने आप के अंदर बहुत कमी महसूस होती थी। मेरे कॉन्फिडेंस लेवल भी बिल्कुल कम हो चुका था। इस वजह से मैं किसी से अच्छे से भी बात नहीं कर पा रही थी। फिर एक दिन मैं जहां काम करती थी वहां मेरी मुलाकात एक लड़के से हुई। उसका नाम जिगर था। वह बहुत ही हैंडसम था। मैंने उससे पहले तो कुछ बात नहीं की लेकिन जब वह अपने आप ही मुझसे बात करने लगा तो मैंने भी उससे बात करनी शुरू कर दी। अब हम लोगों की फोन पर बातें हो जाया करती थी। मैं जिगर से फोन पर ही बात किया करती थी लेकिन मेरी उससे इतनी भी बात नहीं होती थी कि मैं इसे अपने बारे में कुछ बता पाऊं। एक दिन वह मुझे ऑफिस के बाहर मिला और कहने लगा तुम कैसी हो। मैंने उसे बताया मैं ठीक हूं। बातों बातों में मैंने उसे बता दिया कि मुझे एक अच्छा लड़का देखना है। जिसके ना होने की वजह से मेरी समाज में बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है और मेरे घरवाले भी मुझे बहुत हीन भावना से देखते हैं। अब मेरी बातों को वह समझ चुका था और उसने मेरी मदद की। वह कहने लगा कि मेरी कुछ दोस्त है। मैं तुम्हे उनसे मिलवाऊंगा। वह उनके पास मुझे लेकर गया।
उनके साथ रहकर धीरे-धीरे मैं अपने आप को बदलने लगी और मैंने अपने आप को इतना बदल लिया था कि मैं पहले जैसी बिल्कुल भी नहीं दिखती थी। इन सब के पीछे जिगर का ही हाथ था। अब मेरी और जिगर की बातें बहुत होने लगी। क्योंकि उसने मेरी बहुत ही मदद की वह हर बार मेरी मदद किया करता था। जिगर के पिताजी का अपना ही बहुत बड़ा कारोबार है। वह भी उनके ही काम संभालता है। मेरे दिल में भी जिगर के लिए अब कुछ फीलिंग आने लगी थी लेकिन अब मेरे घर वाले मेरे लिए कुछ ज्यादा ही रिश्ते देखने लगे। अब मैं भी पहले से अच्छी दिखने लगी थी और मेरे घर में सब लोग मेरे पीछे पड़े हुए थे। तभी कुछ दिनों बाद मेरे लिए एक लड़के का रिश्ता आया। मेरे घरवाले उस रिश्ते के लिए मान गए और कहने लगे कि तुम्हें उस लड़के से सगाई करनी पड़ेगी लेकिन मैंने उन्हें कहा कि मुझे अभी थोड़ा समय चाहिए। मैं अभी शादी नहीं करना चाहती लेकिन वह मेरे पीछे पड़े रहे और कहने लगे कि तुम शादी क्यों नही करना चाहती। अब तुम्हारी उम्र भी बहुत हो चुकी है और बाद में तुमसे कोई भी शादी नहीं करने वाला। जब उन्होंने यह बात मुझसे कही तो मेरे मन में जिगर का ख्याल आया। क्योंकि मैं अब जिगर से शादी करना चाहती थी और मेरे घर वालों ने मेरे लिए कहीं और लड़का देखा हुआ था। परंतु मैं उस रिश्ते के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। मेरे पिताजी मेरे पीछे ही पड़े हुए थे और कहने लगे कि तुम्हें तो यह रिश्ता करना ही पड़ेगा  मुझे भी अब लग रहा था कि मैं जिगर से इस बारे में बात कैसे करूं। क्योंकि मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि उससे इस बारे में बात करू। वह मुझे अपना एक बहुत ही अच्छा दोस्त मानता था लेकिन मुझे भी लग रहा था कि अगर मैंने उसे यह बात बताई तो उसे कहीं इस बात का बुरा ना लग जाए। इस वजह से मैंने उसे यह बात नहीं बताई। उसके बाद जब मेरी सगाई हो गई तो मैंने अपनी सगाई की बात जिगर को बताई। जिगर इस बात से बहुत ही गुस्सा हो गया और कहने लगा कि तुमने मुझे अपनी सगाई के बारे में कुछ भी नहीं बताया और मुझे अपने घर भी नहीं बुलाया। मैं अब भी जिगर के लिए अपने दिल में ख्याल ढूंढ रही थी लेकिन मैंने उसे अब भी नहीं बताया की मेरे दिल मे उसके लिए क्या है और ऐसे ही समय बीत रहा था।
मैंने एक दिन सोचा कि मैं उसे सब कुछ बता देती हूं। मैं उसके घर चली गई मैंने उसे सब कुछ बता दिया तो वह कहने लगा कि तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया। तुम बहुत अच्छी लड़की हो और मैं भी तुमसे शादी करना चाहता हूं। जब उसने यह बात कही तो मैं बहुत खुश हो गई उसने तुरंत ही मुझे अपने गले लगाते हुए किस करना शुरू कर दिया और मुझे वहीं जमीन पर लेटा दिया। वह मेरे नरम होठों को बहुत ही अच्छे से चूस रहा था और मेरे चूत को भी दबा रहा था। उसने मेरे कपड़ों को उतार कर फेंक दिया और थोड़ी देर तक मैं उसके लंड को चुसती रही मुझे बहुत मजा आया जब मैंने उसको अपने मुंह में लिया। उसके बाद उसने मेरे स्तनों को बहुत ही अच्छे से चूसा जिससे मेरी उत्तेजना बहुत बढ़ गई और जब उसने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो मेरी चूत से खून की पिचकारी निकल गई और वह बहुत खुश हुआ। मुझे कहने लगा तुम्हारी सील आज तक किसी ने नहीं तोड़ी।
मैंने उसे कहा इतने सालों से मुझे लड़कों ने नहीं छुआ तो सील कौन तोड़ेगा। अब यह बात सुनकर वह और भी तेज मुझे चोदना लगा। मुझे वह इतनी तीव्र गति से चोद रहा था कि मेरा शरीर पूरा हिलाने लगा और मुझे बहुत ही आनंद आने लगा। मेरे अंदर से सेक्स का कीड़ा भी बाहर आ गया।  मैं भी बड़ी तेज तेज आवाज में चिल्लाने लगी मैं अपनी मादक आवाज में चिल्लाती जा रही थी। जिससे वह और उत्तेजित होने लगा और कहने लगा तुम तो बहुत ही सेक्सी हो तुम्हारा फिगर तो बहुत सेक्सी है। वह मुझे ऐसे ही झटके देते जाता जिससे कि मेरा शरीर पूरा हिलने लगा और वह मेरे स्तनों को अपने मुंह में बड़े ही प्यार से ले लेता। बहुत देर तक उसने मुझे ऐसे ही चोदना जारी रखा जिसके बाद उसने मेरी चूत के अंदर अपना वीर्य को गिरा दिया। उसने बाद उसने मेरे मुंह में लंड डाल दिया। मैंने उसे चूसने लगी और वह मुझे कहता कि तुम बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को सकिंग कर रही हो। मुझे बहुत ही मजा आ रहा है जब तुम उसे अपने मुंह में लेकर चूस रहे हो। मैंने बहुत देर तक उसको अपने मुंह में लेकर चूसना जारी रखा और उसका मेरे मुंह के अंदर ही माल गिर गया।
मैं भी बहुत खुश थी और मैंने यह बात अपने घर में बताई और जिगर ने भी मेरे घर में बात की तो मेरी सगाई टूट गई और उसके बाद जिगर और मेरी शादी हो गई अब हम दोनों बहुत खुश हैं।

विदेश से आई एक भाभी को चोदा


मेरा नाम रमेश है और मैं एक टूरिस्ट गाइड हूं। मैं 10 वर्षों से टूरिस्ट गाइड का काम कर रहा हूं। मुझे इस काम को करते हुए करीबन 10 वर्ष हो चुके हैं और मेरे पास देश-विदेश से सब लोग मुझसे संपर्क करते हैं। जब भी वह मुझसे संपर्क करते हैं तो मैं उन्हें बहुत ही अच्छे से हैंडल करता हूं और मैं बहुत ही अच्छे से सैर करवाता हूं। जो भी दोस्त एक बार मेरे पास आता है वह दोबारा से अगली बार भी मेरे पास ही आता है। क्योंकि मैं उनके साथ दोस्तों जैसा व्यवहार करता हूं और बिल्कुल भी उन्हें पता ही नहीं चलने देता हूं जब मेरे साथ किसी भी प्रकार की कोई परेशानी होती है। इसी वजह से सब लोग मुझसे बार-बार फोन पर संपर्क में रहते हैं और जब भी वह घूमने आते हैं तो वह मुझे ही फोन कर दिया करते हैं और मैं उन्हें सब कुछ जानकारी दे देता हूं कि मैं उन्हें किस तरीके से घुमाने वाला हूं और कौन सी जगह हम लोग जाने वाले हैं। इसलिए वह भी मुझसे ही संपर्क करते हैं।
एक बार मुझे किसी व्यक्ति का फोन आया और वह मुझे कहने लगे कि हम लोग आपको हायर करना चाहते हैं और आपके बारे में हमें किसी मित्र ने बताया कि आपका व्यवहार बहुत ही अच्छा है और आप एक सज्जन व्यक्ति हैं। आपको बहुत नॉलेज भी है कि कौन सी जगह घूमने के लिए उपयुक्त होती है। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप आ जाइए और मुझसे संपर्क कीजिएगा। जब मैंने पूछा कि आप लोग कब तक आने वाले हैं तो वह कहने लगे कि हम लोग अगले हफ्ते तक पहुंच जाएंगे। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप अगले हफ्ते तक आ जाइए और मैं आपको पूरा राजस्थान घुमा दूंगा। एक हफ्ते बाद उन्हीं व्यक्ति का फोन मुझे आया और वह कहने लगे कि हम लोग जयपुर में पहुंच चुके हैं। मैंने उन्हें कहा कि आप लोग कौन से होटल में रुके हैं। मैं आपके पास उसी होटल में आ जाता हूं। उन्होंने अपने होटल का एड्रेस मुझे भेज दिया और मैं उनके पास उनके होटल में ही चला गया। जब मैं उनके होटल में गया तो वहां पर उनकी पत्नी भी साथ में थी और वह कहने लगी कि हम लोग विदेश से आए हैं और हमारे एक मित्र ने आपके बारे में बताया था। मैंने उनसे पूछा कि आप लोग कहां के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि हम लोग उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और हमारे पिताजी हमें बचपन में ही विदेश ले गए थे और तब से हम लोग उन्हीं के साथ रह रहे हैं लेकिन अब हमारी घूमने की इच्छा हुई तो हमने आपसे संपर्क कर लिया।

अब उन्होंने मुझे अपनी पत्नी से भी मिलाया उनकी पत्नी का नाम रमा था और उन व्यक्ति का नाम राजेश था। वह दोनों बहुत ही खुले विचारों के थे। क्योंकि वह विदेशी माहौल में पले-बढ़े थे। इसलिए वह बिल्कुल ही अच्छे तरीके से व्यवहार कर रहे हैं। अब मैंने उन्हें कहा कि आज तो आप लोग आराम कीजिए। कल हम लोग घूमने चल पड़ेंगे। उन्होंने मुझे कहा कि आज आप शाम को हमारे साथ डिनर पर चल सकते हैं तो आप आ जाइए। मैंने कहा ठीक है। मैं शाम को आपको आपके होटल में ही मिलता हूं और मैं अब अपने घर चला गया। जब मैं वापस शाम को लौटा तो वह लोग तैयार होकर मेरा इंतजार डिनर टेबल पर कर रहे थे। जब मैं वहां पहुंचा तो मैंने उन्हें सॉरी कहा क्योंकि मुझे आने में लेट हो गई थी। वह मुझे कहने लगे कोई बात नहीं आप आराम से बैठ जाइए। अब हम तीनो लोग बैठे हुए थे और बातें करने पर लगे हुए थे। वह भी मुझसे काफी सारी जानकारियां ले रहे थे कि आप को कितने वर्ष हो चुके हैं यहां काम करते हुए और आपके पास कौन-कौन सी जगह से टूरिस्ट संपर्क करते हैं।
मैंने उन्हें बताया कि मुझे करीबन 10 वर्ष हो चुके हैं और मेरे पास पूरी दुनिया के टूरिस्ट संपर्क करते हैं और मैं उन्हें बहुत ही अच्छे से घुमाता हूं और उन्हें सारी चीजें अच्छे से समझाता हूं। वह इस बात से बहुत ही खुश हुए और कहने लगे कि इसी वजह से हमारे मित्र आपकी बहुत ज्यादा तारीफ कर रहे थे। अब उन्होंने बताया कि हमारी शादी भी अभी 6 महीने पहले ही हुई है और हम दोनों कॉलेज में साथ में ही थे। इस वजह से हमें लगा कि अब हमें शादी कर लेनी चाहिए। मैंने उन्हें पूछा आप क्या काम करते हैं। वह कहने लगे कि मैं एक इंजीनियर हूं और वही नौकरी कर रहा हूं। मेरी पत्नी की एक हैंडीक्राफ्ट की दुकान है। जब राजेश ने मुझे यह बात बताई तो मैंने उन्हें बताया कि हैंडीक्राफ्ट का तो राजस्थान में बहुत अच्छा काम होता है और यहां से विदेश के लिए बहुत सारा सामान सप्लाई किया जाता है। तभी रमा कहने लगी कि हां मैं भी कुछ सामान यहां से ले कर जाने वाली हूं। क्या आप उसमें मेरी मदद करेंगे। मैंने उसे बताया कि क्यों नहीं, मैं आपकी मदद उसमें जरूर करूंगा। अब हम लोगों ने डिनर किया और मैंने उनसे कहा कि अब मैं अपने घर जाता हूं तो सुबह आप लोग तैयार रहिए। मैं सुबह आपके पास आठ बजे पहुंच जाऊंगा। अब मैं अपने घर चला गया और अगले दिन सुबह सुबह उनके पास पहुंच गया। जब मैं सुबह उनके पास पहुंचा तो वह दोनों तैयार बैठे हुए थे और मैं उन्हें अपने साथ घुमाने ले गया मैंने उन्हें सारी जगह घूमाया और वह दोनों बहुत ही खुश थे। अब वह भी मेरे साथ दोस्त की तरह व्यवहार कर रहे थे और वह दोनो कुछ ज्यादा ही मुझसे घुलमिल गए थे। मुझे उनके साथ बहुत मजा आ रहा था क्योंकि उन लोगों का व्यवहार बहुत ही अच्छा था। मैं उन्हें घुमाकर अब वापस लौट आया और वह दोनों अपने होटल में चले गए। उसके बाद मैं वहां से अपने घर आ गया। अगले दिन भी मैंने उन्हें ऐसे ही घुमाया और फिर हम लोग वापस लौट आए। जब हम लोग वापस आए तो रमा ने मुझे कहा कि क्या आप मुझे हैंडीक्राफ्ट का सामान दिलवा सकते हैं। मैंने उसे कहा कि आप मेरे साथ कल चलिए मैं कल आपको सामान दिलवा देता हूं। अब मैं अपने घर चला गया।
अगले दिन जब मैं होटल पहुंचा तो राजेश कहने लगा कि आज मेरी तबीयत थोड़ा ठीक नहीं है तो तुम एक काम करो रमा को अपने साथ ले जाओ और उसे ही सामान दिखा लाना। मैं अब रमा को अपने साथ ले गया और उसे सामान दिखा रहा था। वह बहुत ही खुश हो रही थी जब मैं उसे नए-नए तरीके से सामान दिखा रहा था उसने काफी सारा सामान खरीद लिया था। मैंने उसे कहा कि चलो मेरे घर पर चलते हैं मैं उसे अपने घर पर ले आया। मैंने उसे एक नकली लोहे लंड दिखाया जो कि बहुत ही पुराना था। मैंने उसे कहा यह मुझे किसी ने दिया था वह कहने लगी कि तुम मुझे यह लंड दे दो मैं उसे अपनी चूत मे लूंगी।  मैंने तुरंत ही अपने लंड को निकालते हुए उसके मुंह में दे दिया। वह उसे बहुत अच्छे से चूसने लगी और थोड़ी देर बाद उसने अपने कपड़ों को खोलते हुए अपने दोनों पैरों को मेरे आगे कर दिया। मैंने जब उसकी चूत को देखा तो वह बहुत ही नर्म और मुलायम थी। मैंने भी तुरंत अपने लंड को उसकी चूत में घुसेड़ दिया। जब मैंने अपने मोटे लंड को उसकी चूत में डाला तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत ही मोटा और अच्छा है मुझे बहुत ही मजा आ रहा है।
अब मैं उसे ऐसे ही धक्के दे रहा था और वह मादक आवाज निकालने लगी और वह कह रही थी कि मुझे बहुत ही मजा आ रहा है। मै उसे ऐसे ही चोदने में लगा हुआ था वह मुझसे बहुत ज्यादा खुश हो रही थी और कहने लगी कि राजेश तो मुझे इतना अच्छे से नहीं चोदता है लेकिन तुमने मेरी इच्छा पूरी कर दी है। शादी के बाद मैंने तुम्हारे साथ ही अच्छे से सेक्स किया है। मैंने भी उसके मुंह के अंदर अपने लंड को डाल दिया वह उसे अच्छे से सकिंग करने लगी। वह इतने अच्छे से मेरा लंड चूस रही थी कि मेरा वीर्य उसके मुंह के अंदर ही जा गिरा और वह बहुत ही खुशी थी। वह कहने लगी तुमने तो मेरी इच्छाओं को पूरा कर दिया अब जब भी मुझे मौका मिलता तो मैं रमा की चूत मार देता। पंरतु अब वह विदेश चली गई लेकिन मेरी उससे फोन पर बात हो जाया करती है और वह भी किसी न किसी बहाने से घूमने के लिए आ जाती है। तब मैं उसे बहुत ही अच्छे से चोदता हूं।

अपने ही शोरूम की लड़की को स्टोर रूम में चोदा


मेरा नाम रमन है और मेरी उम्र 25 वर्ष है। मैं एक छोटे से शहर का रहने वाला हूं। मैं पहले एक दुकान में काम किया करता था। वहां काम करते हुए मुझे बहुत समय हो चुका था लेकिन एक दिन दुकान के मालिक ने मुझे निकाल दिया। क्योंकि किसी लड़के ने दुकान में कुछ चोरी कर ली थी। तो उसने मुझे भी वहां दुकान से निकाल दिया। मैंने उससे बहुत कहा कि मैंने चोरी नहीं की है लेकिन उसके बावजूद भी वह कहने लगा कि तुमने भी चोरी की है और तुम्हारा दोस्त अभी तक गायब है। मैंने उसे समझाया कि मैंने चोरी नहीं की है लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आया और उसने मुझे कहा कि तुम कल से काम पर मत आना। मैं घर पर खाली बैठा हुआ था। मेरे पास कुछ भी काम नहीं था और मुझे कहीं कोई काम मिल भी नहीं रहा था। मैं बहुत परेशान होने लगा कि मुझे कहां काम मिलेगा लेकिन कहीं पर भी मुझे काम नहीं मिल रहा था और अब मुझे लगने लगा कि कहीं मैं ऐसे ही ना बैठा रहूं। क्योंकि मेरे पास कुछ भी पैसे नहीं थे जिससे मैं कोई नया काम शुरू करता।
कुछ दिनों बाद मुझे मेरा एक बहुत पुराना दोस्त मिला। वह मुझे करीबन 5 वर्ष बाद मिल रहा था। उसने मुझे देखते ही पहचान लिया और मुझसे मेरा हालचाल पूछने लगा। कहने लगा तुम क्या कर रहे हो। मैंने उसे बताया कि आजकल तो कुछ भी नहीं कर रहा हूं। मैंने उससे अपनी सारी कहानी बताई, कि हमारी दुकान में चोरी हो गई थी। उसके बाद मुझे वहां के मालिक ने निकाल दिया है और मैं अभी फिलहाल कुछ भी नहीं कर रहा हूं। वह कहने लगा तुम एक काम करना मेरे साथ ही चलना। मैं तुम्हें अपने शोरूम में काम पर लगवा दूंगा। मैंने उसे कहा ठीक है। यह तो मेरे लिए बहुत अच्छी बात है लेकिन मुझे पहले अपने घर में यह सब बताना पड़ेगा। उसने मुझे कहा कि मैं अभी 15 दिनों के लिए घर पर ही हूं। 15 दिन तक तुम सोच लेना उसके बाद हम चल पड़ेंगे। फिर वह मुझे दो-तीन दिनों बाद मिला। मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूं लेकिन मैंने उससे अभी भी यह बात नहीं पूछी कि वह कौन से शहर में रहता है। जब मैंने उससे पूछा तो उसने मुझे बताया कि वह जलंधर में रहता है और वहीं पर वह काम करता है।
मेरे दोस्त का नाम राकेश है। राकेश ने ही मेरी टिकट करवा दी और वह मुझे अपने साथ ही ले गया। जब हम जालंधर पहुंच गए तो उसने मुझे कहा कि तुम कल तैयार रहना। कल मैं तुम्हें अपने साथ ही शोरूम ले चलूंगा। अगले दिन मैं तैयार होकर उसके साथ चला गया। मैं जब शो रूम में पहुंचा तो मैंने देखा वह बहुत ज्यादा बढ़ा है। मैंने उसे कहा कि तुम्हारा शोरूम तो बहुत ज्यादा बढ़ा है। वह एक कपड़े का शोरूम था। राकेश ने मुझे अपने मालिक से मिलवाया। उसने मुझसे पूछा तुमने पहले कहीं काम किया है  मैंने उसे बताया कि मैंने अपने शहर में ही एक दुकान में काम किया था। वह कहने लगा ठीक है। अभी तुम्हें कुछ दिन यहां काम सीखने में लगेंगे, तो उसने मुझे वहीं पर रख लिया। अब राकेश मुझे काम सिखाने लगा। कुछ दिनों बाद मुझे सारे शोरूम का काम पता चल गया और अब मुझे यहां काम करते करते 3 महीने हो चुके थे। हमारे यहां पर काफी सारे लोग काम करते थे। अब मैं कुछ पैसे अपने घर भी भेज दिया करता था और थोड़े बहुत पैसे मैं जमा भी करने लगा। एक दिन हमारे शोरूम में एक नई लड़की काम करने के लिए आई। वह बहुत ज्यादा सुंदर थी। उसका नाम रोशनी था। पहले कुछ दिनों तक तो मैंने उससे बात नहीं की लेकिन अब काम के सिलसिले में हम लोगों की बात होने लगी। वह मुझसे कुछ भी सामान का उसका रेट पूछती तो मैं उसे बता दिया करता।
अब हमारी बातें होने लगी। वह मुझे बहुत ही अच्छी लगने लगी लेकिन मैं उससे बात नहीं कर पा रहा था। 1 दिन मैंने सोचा आज मैं उससे अच्छे से बातें कर ही लेता हूं। उस दिन शोरूम में ज्यादा काम नहीं था तो मैं उसके पास में जाकर ही बैठ गया और उससे बातें करने लगा। मैंने उससे उसके बारे में जानकारी ली वह कहने लगी कि मैं अभी कॉलेज कर रही थी लेकिन हमारे घर की कुछ परिस्थितियां खराब हो गई। इस वजह से मुझे यहां शोरूम पर काम करना पड़ा। मैंने उससे पूछा कि क्या परेशानी हो गई थी। वह कहने लगी कि मेरे पिताजी का देहांत हो गया और हमारे घर पर सिर्फ वही कमाने वाले थे। इसलिए मुझे अब यहां काम करना पड़ रहा है। मुझे उसकी बात से थोड़ा सा बुरा भी लगा। मैंने उससे पूछा तुम्हारे पिताजी का देहांत कब हुआ। वह कहने लगी, अभी कुछ दिन पहले ही उनका देहांत हुआ है। रोशनी ने भी मेरे बारे में पूछा तो मैंने उसे अपने बारे में बताया कि हमारे घर पर भी परिस्थितियां ठीक नहीं थी। इसलिए मुझे शहर आकर काम करना पड़ा। मैंने उसे बताया कि मुझे यहां राकेश ने काम पर लगवाया था। क्योंकि वह भी हमारे यहां का रहने वाला है। मेरी रोशनी से बहुत ज्यादा बातें होने लगी वह कभी कबार मेरे लिए टिफिन ले आती थी।
एक दिन हम लोग लंच करने बैठे हुए थे। मैंने उससे बातों-बातों में उसके हाथ को पकड़ लिया वह मेरे इशारे समझ चुकी थी। मैंने उसे कहा कि तुम क्या मेरे साथ सेक्स करना चाहती हो। वह मेरी बातों को मान गई क्योंकि उसकी भी चूत मे खुजली थी। जब हमारे दुकान के मालिक नहीं थे तो मैं काम के बहाना बना कर वहां से बाहर अपने स्टोर में चला गया। थोड़ी देर बाद रोशनी भी वहां आ गई। जैसे ही वह वहां पहुंची तो मैंने तुरंत ही उससे अपनी बाहों में भर लिया और कस कर पकड़ लिया। मैंने उसे इतना कस कर पकड़ा की वह हिल भी नहीं पा रही थी और मुझे कहने लगी कि तुमने तो मुझे कुछ ज्यादा ही कसकर पकड़ लिया है। मैं उसके स्तनों को भी अपने हाथों से बड़े जोर से दबा रहा था। मैंने जल्दी से उसके कपड़े भी खोल दिए और उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा।
जैसे ही मैंने उसके स्तन देखे तो वह बहुत ज्यादा गोरे थे मैंने उस पर लव बाइट भी थी थी। जिससे कि वह और उत्तेजित हो गई। अब मैं उसके होठों को भी ऐसे ही बड़े प्यार से किस कर रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी सलवार को भी नीचे उतार दिया। मैंने देखा कि उसने एक नेट वाली पैंटी पहनी हुई है और मैंने उसकी पैंटी को उतारते हुए उसकी चूत को चाटना शुरु किया है। ऐसे ही मैं बहुत देर तक उसकी चूत को चाटता रहा। जब उसकी चूत गीली हो गई तो मैंने उसे वहीं जमीन पर लेटा कर उसके दोनों पैरों को खोलते हुए अपने लंड को अंदर डाल दिया। उसकी चूत बहुत ज्यादा टाइट थी जिससे कि मुझे बहुत दिक्कत हो रही थी लेकिन मैंने ऐसे ही बड़ी तेजी से उसकी चूत मे लंड को डालते हुए प्रहार करना शुरू किया। वह बड़ी तेजी से चिल्ला रही थी और मैं उसे ऐसे ही झटके दिए जा रहा था। वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो जाती और मेरे हाथों को दबा देती। मैंने भी उसके दोनों पैरों को और चौड़ा करते हुए उसे चोदना जारी रखा। थोड़ी देर बाद मैंने उसे घोड़ी बना दिया और दोबारा से उसकी चूत मे जैसी ही अपना लंड डाल रहा था तो मैने देखा कि उसकी चूत से खून निकल रहा है। लेकिन मैंने एक ही झटके में उसकी चूत मे दोबारा से अपने लंड को डाल दिया और अब इतनी तेज तेज प्रहार करने लगा कि उसकी चूतडे मेरे लंड से टकरा रही थी।
अब वह कुछ ज्यादा ही तेज चिल्ला रही थी लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगता जब वह इस प्रकार से चिल्लाती जाती। मैंने उसके चूतड़ों को बहुत कसकर पकड़ रखा था जिससे कि वह हिल भी नहीं पा रही थी। मैं जब उसके चूतड़ों को देखता तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था क्योंकि वह एकदम गोल और टाइट थी। मै उसे ऐसे ही बड़ी तेजी से झटके मारना जाता और मुझे मजा आ रहा था। मेरा माल भी चरमसीमा पर पहुंचने वाला था तो मैंने उसे बड़ी तीव्र गति से झटके मारा। जिससे कि उसकी चूतड मेरे लंड से टकरा जाती और उनसे बड़ी तेज आवाज निकलती। वह भी बहुत तेज से चिख रही थी। मैंने तुरंत ही अपने लंड को बाहर निकालते हुए अपने माल को उसके चूतडो पर गिरा दिया। जैसे ही मैंने अपने वीर्य को उसके चूतड़ों पर गिराया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ गया। हम दोनों ने जल्दी से अपने कपड़े पहने और दुकान में वापस आ गए। उसके बाद से तो ना जाने मैंने कितनी दफा उसे स्टोर रूम में चोदा होगा।
 

गांव में मिले लड़के से अपनी चूत होटल मे मरवाई


मेरा नाम अर्चना है और मैं बेंगलुरु की रहने वाली एक बहुत ही मॉडल ख्यालों की लड़की हूं। मेरी उम्र 25 वर्ष है। मेरे कई लड़कों के साथ अफेयर हैं पर उसके बावजूद भी मुझे आज तक कोई ऐसा लड़का नहीं मिला जिसकी तरफ मैं आकर्षित हो सकूं और मैं उसे सच्चा प्रेम कर सकू। मैं कई लड़कों से बात तो करती हूं परंतु उसके बाद भी मुझे आज तक कोई अच्छा लड़का नहीं मिल पाया। मुझे कोई ऐसा लड़का चाहिए जिसे मैं खुद सामने से प्रपोज करूं। मैं उससे कहूं कि मैं तुमसे प्यार करती हूं और मैं उसके लिए सब कुछ निछावर कर दूं। मेरा अपना एक बुटीक है और मैं उसे काफी समय से चला रही हूं। मेरा बुटीक अच्छा चलता है और मेरे पास कई तरीके के कस्टमर आते हैं। मेरे पास बहुत सारी लड़कियां और महिलाएं आती हैं। मैं उनके हिसाब से कपड़े प्रोवाइड करवाती हूं। जब भी मेरे पास महिलाएं आती हैं तो मैं हमेशा ही इनकी डिमांड पूरी कर देती हूं और मैं उन्हें कहीं ना कहीं अच्छे कपड़े प्रोवाइड करवा ही देती हूं। जिससे कि वह मेरे पास ही आते हैं। उनके साथ मेरा संबंध बहुत ही अच्छे तरीके से बना हुआ है। मैंने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स भी किया है। उसके बाद ही मैंने अपना काम शुरू किया था।
सब लोग मेरे व्यवहार की वजह से ही मेरे पास आते हैं और वह हमेशा कहते हैं कि जिस तरीके से तुम नए नए डिजाइन के कपड़े अपने लिए बनाते हो, उसी तरीके के कपड़े हमारे लिए भी बना लिया करो। उन्हें मेरे बुटीक में आना बहुत ही अच्छा लगता है। मेरे बुटीक में जितनी भी लड़कियां आती है वह सब मेरी बहुत ही अच्छी दोस्त बन चुकी हैं और उनके साथ मेरा घरेलू संबंध भी बन चुका है। मैं उनके बारे में सब कुछ जानती हूं। मेरी कस्टमर बहुत ही खुश रहते हैं। मेरी दो बहन हैं और उन दोनों की शादी हो चुकी है। अब मेरी शादी होनी ही बाकी है लेकिन मुझे कोई भी लड़का पसंद नही आ रहा है। इस वजह से मैं शादी नहीं करना चाहती।
एक दिन मेरे पिताजी ने मुझे कहा कि हम लोग गांव चल रहे हैं। मैंने उन्हें कहा कि आप गांव क्यों जा रहे हैं। वह कहने लगे कि हमारे गांव में एक रिश्तेदार की शादी है तो हमें वहां जाना है। मैंने कहा ठीक है तो फिर हम लोग गांव चलते हैं। मुझे भी काफी समय हो चुका था गांव गए हुए तो मैंने सोचा कि अब हम लोग चले ही जाते हैं। मैं अपने पिताजी से कहा ठीक है आप लोगों कब का टूर बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों बाद हमारा जाने का हो जाएगा तो तुम तैयार हो जाना। मैंने कहा ठीक है आप उसकी चिंता मत कीजिए। अब हम लोग गांव चले गए। जब हम गांव पहुंचे तो हमे गाँव में बहुत ही अच्छा लग रहा था। क्योंकि वहां पर खुली हवा चल रही थी। घर भी खुले खुले थे। मुझे बहुत अच्छा लगता है इस तरीके का माहौल लेकिन मेरा गांव में ज्यादा आना नहीं हो पाता था और जब मैं शादी में थी तो सब मेरी तरफ़ ही घूर कर देख रहे थे। क्योंकि मैंने कपड़े ही कुछ अलग तरीके के पहने थे। वह गांव में पहनने उचित नहीं है। पर फिर भी मुझे जो पसंद आता है मैं वही पहन लेती हूं। अब मैं शादी में अपनी मम्मी के साथ थी और हम लोग सब से बैठे हुए थे। तभी एक लड़का मुझे गांव में दिखाई दिया। वह बहुत स्मार्ट और हैंडसम था। उसकी हाइट 6 फुट के करीबन थी। उसे देखते ही मेरे दिल में कुछ हलचल सी पैदा होने लगी और वह मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा।
मैंने सोच लिया था कि मैं उससे बात कर के ही रहूंगी और वह भी मुझे देखे जा रहा था। वह बहुत देर से मुझे घूर रहा था। मैं जब उसके पास गई तो मैंने उससे पूछा क्या मैं इतनी ज्यादा अच्छी लग रही हूं जो तुम मुझे इतनी देर से घूरे जा रहे हो। वह कहने लगा कि तुम अच्छी लग रही हो। इसी वजह से मैं तुम्हें देख रहा हूं। मैंने उसे अपना नाम बताया और जब मैंने उसे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम पवन बताया। मैं बहुत ही खुश हुई। वह मुझसे बात कर रहा था। मुझे उससे बात करना बहुत ही अच्छा लग रहा था। वह बहुत ही ज्यादा हैंडसम था। मैंने उससे पूछा कि तुम कहां रहते हो। तो वह कहने लगा कि मैं तो दिल्ली में रहता हूं। अब हम दोनों की बहुत बात हो रही थी। परंतु मैंने उसका नंबर नहीं लिया और मैं कुछ दिनों बाद बेंगलुरु चली गई। मेरे दिमाग में अभी भी पवन की तस्वीर छपी हुई थी और मैं उसके बारे में ही सोच रही थी लेकिन अब कोई फायदा नहीं था और मेरे दिमाग से वह निकलता जा रहा था। मैं अपने काम में बिजी हो गई। परंतु एक दिन वह मुझे मिल गया और जब वह मुझे मिला तो मैं बहुत खुश हुई। मैंने उससे पूछा कि तुम यहां क्या कर रहे हो। वह कहने लगा बस ऐसे ही कुछ काम से आया था। मैंने उसे कहा कि तुम कहां रुके हुए हो। वह कहने लगा कि होटल में रुका हूं। इस बार मैंने उससे उसका नंबर ले लिया और मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हें फोन करूंगी। अब मैं अपने घर चली गई और मैं मन ही मन बहुत खुश हो रही थी। मैंने रात को पवन को फोन किया और उससे बहुत देर तक मैंने फोन पर बात की। मुझे पता ही नहीं चला कब मैं उससे बात करते-करते सो गई। जब मैं सुबह उठी तो मैंने पवन को दोबारा फोन किया और उससे कहा कि सॉरी मैं कल बात करते-करते सो गई थी।  वह कहने लगा कोई बात नहीं, मुझे भी उसके कुछ देर बाद नींद आ गई थी।
पवन ने मुझे कहा कि तुम मुझे मिलने मेरे होटल में ही आ जाओ। मैं उसे मिलने के लिए उसके होटल में चली गई जब मैं उसके रूम में गई तो उसके कमरे में सारा सामान बिखरा हुआ था। पवन मेरे सामने आकर बैठ गया जब वह मेरे सामने आकर बैठा तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। अब मैंने  उसके हाथों को पकड़ लिया और कहने लगी कि तुम कितने दिनों तक यहां पर रहोगे। वह कहने लगा कि मैं अभी कुछ दिन और रहूंगा। अब वह भी मेरे बालों को सहलाने लगा उसने धीरे धीरे मेरे गालों पर अपना हाथ लगाना शुरू कर दिया। उसने मेरे होठों को अपने होठों में ले लिया। जैसे ही उसने मेरे होठों को किस करना शुरू किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा। मैंने भी उसे कसकर पकड़ लिया और उसके होठों को चूमने लगी। मैं उसके होठों को इतने अच्छे से चूम रही थी कि मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और वह भी मेरे होठों को बड़े ही अच्छे से चूम रहा था। कुछ देर बाद उसने मुझे लेटा दिया और उसने मेरे सारे कपड़े खोल दिया। अब वह मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मेरी योनि को चाटने लगा। वह मेरी योनि को बहुत ही अच्छे से वह चाट रहा था जिससे कि मेरी चूत से पानी का रिसाव होता जाता। वह मेरी चूत को अच्छे से चाटे जा रहा था। अब उसने अपने लंड को मेरी योनि में डाल दिया और जैसे ही उसने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डाला तो मेरी उत्तेजना चरम सीमा पर पहुंच गई।

वह मेरी टाइट चूत के मजे लेने लगा। वह मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब वह मुझे धक्के दिए जा रहा था। उसने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा कर रखा था और वह बड़ी तेजी से मुझे झटके दिए जाता। मुझे बड़ा ही आनंद आता जब वह इस प्रकार से मुझे चोद रहा था। कुछ देरे बाद पवन ने मेरे मुह के अंदर अपने लंड को डाल दिया और वह मेरे मुंह में धक्के देने लगा। मैं उसके लंड को बहुत ही अच्छे से चूसे जा रही थी। मैंने उसके लंड को इतने अच्छे से चूसा कि वह मुझे कहने लगा मुझे बहुत ही मजा आ रहा है जब तुम मेरे लंड को अपने गले तक उतार रही हो। मैं  अब भी ऐसे ही उसके लंड को चूसने पर लगी हुई थी और वह बड़ी ही तेजी से मेरे गले के अंदर धक्के दिया जाता। कुछ देर बाद उसने मुझे घोड़ी बनाते हुए मेरी योनि के अंदर अपना लंड डाल दिया। जैसे ही उसने मेरी योनि में अपने लंड को डाला तो मैं चिल्ला उठी और मुझे बहुत ही मजा आने लगा। जैसे ही मैं उसके लंड को अपनी योनि में लेती तो वह बड़ी तीव्रता से मुझे धक्के दिए जा रहा था। मैं भी अपनी चूतड़ों को उससे मिलाती जा रही थी। एक समय बाद जब उसका वीर्य मेरी योनि के अंदर गिर गया तो मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरी योनि में कुछ गर्म चीज चली गई हो।

Monday, September 24, 2018

दोस्त की बीवी को होटल में चोदा


मेरा नाम रविंद्र है। मैं एक बिजनेसमैन हूं और मेरी उम्र 45 वर्ष है। मैं अपने बिजनेस के सिलसिले में बहुत ज्यादा ही बिजी रहता हूं और अपने घर वालों को बिल्कुल भी समय नहीं दे पाता हूं। मैंने बहुत मेहनत की है अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए। मैंने इसमें दिन रात एक  करके ही आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं। अब मैं एक अच्छा और सक्सेसफुल बिजनेसमैन हूं। मैं अपनी पत्नी और बच्चों को जब भी मुझे समय मिलता है मैं उन्हें घुमाने के लिए कहीं विदेश में ले जाता हूं। जिससे कि उन्हें भी मुझसे कोई  शिकायत नहीं रहती है कि, मैं उन्हें समय नहीं दे पाता हूं। मुझे पता ही नहीं चला कि मुझे अपना बिजनेस करते हुए कब 15 साल हो गए और मेरे कॉलेज के कई सारे दोस्त पता नहीं अब कहां हैं। उनसे हमारा कोई संपर्क भी नहीं हो पाता है लेकिन मैं सोचता रहता था कि कभी मौका मिलेगा तो जरूर उन लोगों से मुलाकात कर लूंगा। क्योंकि मैं दिल्ली में ही रहता हूं। इस वजह से ज्यादातर लोग दिल्ली में ही है। हमारी कॉलेज की पढ़ाई भी दिल्ली में ही हुई थी। अब एक बार मैं एक सेमिनार के लिए मुंबई चला गया। वह बहुत ही बड़ा सेमिनार था।





मैं जब उस प्रोग्राम में पहुंचा तो वहां पर काफी अच्छे-अच्छे स्टॉल्स लगे हुए थे और मैं ऐसे ही सॉरी स्टॉल्स को देख रहा था। कुछ ही देर बाद वहां सेमिनार शुरू होने वाला था। अब मैं वहां जाकर बैठ गया। हम लोगों का वह सेमिनार बहुत अच्छा रहा। उसके बाद हॉल के अंदर एक कैंटीन थी तो मैंने सोचा वहाँ पर थोड़ा सा रिफ्रेशमेंट ले लेता हूं। मैं अब वहां पर चला गया। मैं जब वहां बैठा हुआ था तो मेरे पास में ही एक महिला आकर बैठ गई। उसने भी लंच ऑर्डर करवा दिया और ऐसे ही वह अपने फोन में देख रही थी। वह काफी देर से मेरी तरफ देखे जा रही थी और मैं भी उसे देख रहा था। तभी उसके फोन पर कॉल आई। उसने वह फोन उठाया और बातें करने लगी। क्योंकि वह मेरे पास की ही सीट में बैठी हुई थी इसलिए मुझे उसकी बातें सुनाई दे रही थी। जब उसने अपने पति का नाम लिया। मेरे कालेज के दोस्त का नाम भी वही था। तो मुझे ऐसा लगा शायद ये वही है। अब वह दोनी  काफी देर तक बात करते रहे। जब उसने फोन रखा तो मैंने उससे पूछा, क्या आपके पति दिल्ली में ही रहते हैं? उन्होंने मुझे बताया हां। वह दिल्ली में  ही रहते हैं। अब उन्होंने जब अपने पति का नाम बताया तो वह मेरे दोस्त निकल गया।
उन्होंने जब मेरी बात अपने पति से करवाई तो वह भी काफी दंग रह गया और मुझे कहने लगा तुम इतने सालों बाद कहां हो? मैंने उसे बताया कि मैं भी दिल्ली में ही रहता हूं। अभी सेमिनार के सिलसिले में आया हुआ हूं और कुछ दिनों बाद दिल्ली वापस लौटूंगा। हमारी बात काफी देर तक हुई। उसके बाद मैंने फोन रखा अब मैंने उन महिला से जो कि मेरे दोस्त की पत्नी भी थी। मैंने उनका  नाम पूछा, उनका नाम ममता था और वह भी बिजनेस करती हैं। इस सिलसिले में वह भी मुंबई आई हुई थी। हमारी काफी बातें हुई मैंने उनसे पूछा कि आपका काम कैसा चल रहा है? वह कहने लगी बहुत अच्छा चल रहा है। मैं भी ज्यादातर बाहर ही बिजनेस के सिलसिले में जाती रहती हूं। इसलिए मैं भी मुंबई आई हुई हूं। मैं यह बात सुनकर बहुत खुश हुआ। मैंने उन्हें कहा, आप वापस कब जाएंगे? तो वह कहने लगी कि 2 दिन बाद में वापस जाऊंगी। मैंने भी उन्हें कहा कि मेरा भी 2 दिन बाद का ही प्लान है जाने का तो क्यों ना साथ में ही चले।  उन्होंने कहा ठीक है साथ में ही चलेंगे। अब हम दोनों ने फ्लाइट की टिकट बुक करवा ली और साथ में ही दिल्ली वापस आए। हम लोगों की काफी बातें हुई फ्लाइट में मैं उनसे काफी प्रभावित था। जिस तरीके से उन्होंने भी अपना बिजनेस किया था और काफी मेहनत की थी। वह भी मुझसे पूछने लगी कि आपने भी अपने बिजनेस की शुरुआत में काफी दिक्कते देखी होगी। मैंने उन्हें बताया कि जब मैं बिजनेस की शुरुआत कर रहा था तो मुझे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मैं आर्थिक रुप से भी उतना मजबूत नहीं था। जैसेे कैसे मैं अपने बिजनेस को आगे बढ़ाता गया और आज एक सक्सेसफुल बिजनेसमैन हूं। हम लोग जब दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने कहा कि आप कभी हमारे घर आइए। मैंने कहा क्यों नहीं बिल्कुल। अब तो आना ही पड़ेगा अपने दोस्त से भी मिलने के लिए और आपसे भी कुछ ऐसी कुछ बातें हो जाया करेगी।
अब मैं एक दिन ममता के घर चला गया। मैंने वहां देखा मेरे दोस्त भी घर पर ही था वह देखते ही मेरे गले मिल गया और मुझसे पूछने लगा, इतने सालों बाद तुम मिल रहे हो! इतने सालों तक कहां थे? मैंने उसे बताया कि मैं अपना ही बिजनेस कर रहा था। इसलिए मैं ज्यादा इधर उधर ही रहता था। इस वजह से मेरा किसी से ज्यादा संपर्क में नहीं था। हमारी काफी बातें हुई। उसके बाद मेरी ममता से भी बात हुई और मैंने उसकी भी काफी तारीफ की। मैंने कहा कि तुम्हारी पत्नी भी काफी अच्छा बिजनेस कर रही है। तभी ममता ने बोला कि यह तो मेरे पति का ही साथ था। इनकी वजह से ही मैं इस बिजनेस को आगे बढ़ा पाई हूं। हम लोगों ने काफी बातें की उसके बाद मैंने भी उन्हें अपने घर में आने के लिए कहा, मेरा दोस्त कहने लगा कि मेरे पास तो समय नहीं है लेकिन ममता तुम्हारे घर पर आ जाया करेगी। अब हमारे घर में आना जाना लगा रहा और हमारे संबंध काफी अच्छे हो गए।
एक दिन हमारे बिजनेस का सेमिनार चेन्नई में था। वहां पर ममता भी आई हुई थी। मैंने उसे कहा तुम कौन से होटल में रुकी हुई हो तो उसने मुझे बताया मैं इस होटल में रुकी हुई हूं। मैं उसके होटल में चला गया और जब मैं उसके रूम में पहुंचा तो मैंने वहां देखा कि उसकी पैंटी बिस्तर पर पड़ी हुई है। उसने मुझे देखते ही अपने पैंटी को वहां से हटा दिया। मैंने उसे कहा कि यह सब फॉर्मेलिटी करने की जरूरत नहीं है मुझे सब पता है। मैंने उसे कसकर अपनी बाहों में ले लिया जैसे ही मैंने उससे जोर से दबाया तो वह मेरे बाहों में आ गई। वह भी मुझसे कस कर गले लग गई और मैंने जैसे ही उसके होठों को किस करना शुरू किया तो उसने भी मेरे होठों को बड़ी अच्छे से किस करना शुरु कर दिया। जिससे कि वह भी अब मेरे पूरे काबू में आ चुकी थी और उसका बदन मेरे हाथों में था। उसका बदन गदराया हुआ था और वह बहुत सेक्सी और हॉट थी। मैंने तुरंत उसके कपड़ों को उतार कर जैसे ही उसके स्तनों को अपने हाथ में लिया तो मुझे एहसास हुआ कि वह बहुत ही नर्म और मुलायम है। मैं उन्हें अपने मुंह में लेकर रसपान करने लगा। जैसे ही मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लिया तो उसका थोड़ा बहुत दूध भी निकलने लगा और मैंने उसकी चूत मे उंगली डाल दी। मैं अपनी उंगली को अंदर बाहर कर रहा था तो वह बड़ी तेज चिल्ला रही थी। मैंने भी अब उसे अपने लंड के ऊपर बैठा दिया जैसे ही मैंने उसे अपने लंड पर बैठाया तो उसकी चीखें निकल पड़ी और वह मुझ से लिपट कर बैठ गई।
मैं उसके चूतड़ों पर धक्के मारे जा रहा था थोड़ी देर बाद वह ऐसे ही मुझे पकड़ कर बैठी रही। कुछ देर में उसे भी मजा आने लगा तो वह भी अपने चूतडो को ऊपर-नीचे करती जाती और मुझे कहती कि मुझे बहुत ही मजा आ रहा है जब तुम मुझे इस तरीके से चोद रहे हो। मैं ऐसे ही उसे झटके मारता रहा और उसका पूरे शरीर को मैं अपने हाथों से दबाता जाता। वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गई और वह मादक आवाज निकालने लगी जैसे ही उसकी मादक आवाज मेरे कानों में जाती तो मैं बड़ी तीव्र गति से उसे झटके मारने लगा। मैंने तुरंत ही उठाकर उसे घोड़ी बना दिया और उसके चूतड़ों पर बड़ी तेज प्रहार करने लगा। मैं उसे ऐसे ही चोद रहा था कि अचानक से मेरे वीर्य भी गिर गया। जैसे ही मेरा वीर्य उसके योनि के अंदर गया तो मैंने तो अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह में डाल दिया। जो भी मेरा माल टपक रहा था वह सब उसने अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। वह बहुत ही ज्यादा खुश थी और हम जब भी अब कहीं मीटिंग से बाहर जाते तो हम दोनों साथ ही रहते थे।

Tuesday, September 18, 2018

कम उम्र की पड़ोसन भाभी


मेरे प्यारे दोस्तो, मेरा नाम देवा है मैं मध्य प्रदेश के एक शहर का रहने वाला हूँ। दोस्तो मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज का नियमित पाठक हूँ। मेरा लंड का साइज़ 6″ है।
यह हिन्दी सेक्स स्टोरी मेरी और मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी की है और मेरी कहानी करीब आज से 5 साल पहले की है, तब मेरी उम्र 21 थी. तो दोस्तो, मेरी भाभी का नाम सोनी है, जो दिखने में एकदम मस्त है। भाभी की शादी 18 की वर्ष में ही हो गयी थी, तब मेरे मन में उस भाभी को लेकर कोई सेक्स प्रतिक्रिया नहीं थी।
पर दिन गुज़रते गये, मेरे मन में सेक्स के लिए बहुत उत्सुकता बढ़ने लगी. फिर मैंने भाभी से थोड़ी थोड़ी बात शुरू की लेकिन उस समय भी मेरे मन में उनके प्रति ऐसी कोई इच्छा नहीं थी।
फिर एक दिन हुआ यह कि मेरे घर पर कोई नहीं था और मेरी मम्मी ने उसी भाभी को मेरे लिए खाना बनाने का बोल दिया और चली गयी।
मम्मी पापा तो चले गये, मैं भी भाभी का इंतजार कर रहा था और थोड़ी देर में भाभी आ गयी।
भाभी आकर मुझसे बात करने लगी. भाभी की सुंदरता और उनके कामुक बदन को देख कर मेरे मन के ख्याल बदलने लगे. मैं भाभी को कामवासना से भारी निगाहोस से देखने लगा.
थोड़ी देर तक बात करने के बाद भाभी हमारी किचन में खाना बनाने के लिए चली गयी और वो बीच बीच में मुझसे बात भी कर रही थी, आवाज लगा कर मुझसे रसोई के सामान का भी पूछ रही थी कि कौन सा सामान कहाँ रखा है.
भाभी खाना बनाने लगी तो मेरे मन में ख्याल आया कि मैं भी भाभी के साथ रसोई में जाता हूँ. तो मैं भी किचन में चला गया और वहीं खड़े रह कर बात करने लगा और भाभी से टच होने लगा. मेरी हरकतों से भाभी मेरे इशारे समझ गयी पर वो कुछ नहीं बोली.
और फिर मेरी हिम्मत और बढ़ गयी और फिर मैंने भाभी को सीधे सीधे पकड़ लिया एकदम से… तो फिर भी भाभी ने कुछ नहीं कहा. फिर मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया और मैंने भाभी को किस कर दिया.
इस पर भाभी ने मुझसे एकदम से बोल दिया- भैया रूको थोड़ा… आज नहीं, यह सब बाद में करेंगे, यहाँ कोई आ जाएगा!
और भाभी खाना बना कर मुझे अपना मोबाइल नंबर देकर चली गयी और मुझे यह बोल कर गयी कि मैं कल मायके जा रही हूँ, और आपको कॉल करूँगी वहाँ से!
तो मैं मन ही मन में खुश होने लगा और उस रात को मैं भाभी की नाम की मुठ मार के सो गया.
और फिर सुबह हुई और मैं भाभी के कॉल का इंतजार करने लगा. आखिर उनका कॉल आ ही गया और उन्होने मुझे अपने मायके आने के लिए कहा. मैं बिना कोई देरी किये अपने घर से निकल पड़ा.
भाभी का मायका कुछ 20 किलामेटर था और मैं पहुँच गया वहाँ… वहां मैंने देखा कि उनके घर कोई नहीं था, वो मेरा इंतजार ही कर रही थी।
मैं बैठा थोड़ा और भाभी मेरे लिए पानी लेकर आई और मेरे साइड में आकर बैठ गयी.
मैंने पानी पीया और फिर मैंने उनको अपनी बांहों में ले लिया और भाभी को किस करना शुरू किया. भाभी भी मेरा साथ ड़े रही थी चूमा चाटी में!
फिर धीरे धीरे मैं भाभी की साड़ी उतारने लगा और अब भाभी ब्रा और पेटिकोट में थी. फिर मैंने उन का पेटिकोट भी उतार दिया और अब भाभी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी, एकदम मस्त माल लग रही थी और धीरे धीरे करके उन्होंने भी मेरे कपड़े उतार दिए.
और फिर मैंने भाभी की ब्रा खोल दी और उनके मस्त दूध से खेलने लगा। एक बात बता दूँ दोस्तो, भाभी के दूध ज्यादा बड़े तो नहीं थे क्योंकि भाभी की शादी कम उम्र में हुई थी और अभी शादी हुए भी ज्यादा वक्त नहीं बीता था.
मैं अब भाभी के दूध चूसने लगा और एक हाथ मैंने भाभी की पेंटी में डाल दिया तो मैंने देखा कि भाभी की चूत गीली हो गयी है। चूत पर मेरा हाथ पड़ने से भाभी सीत्कारें लेने लगी, उम्म उम्म उम्म उम्म हहहह करने लगी.
और फिर मैंने भाभी की पेंटी निकाल दी। भाभी ने अपनी चूत के बाल साफ़ कर रखे थे. शायद यह तैयारी भाभी ने मेरे लिए ही की थी.
इधर मेरा लंड भी बहुत टाइट हो गया था और भाभी उसे सहला रही थी।
फिर मैंने भाभी से अपना लंड चूसने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया लेकिन मेरे थोड़ा फोर्स करने के बाद वो मान गयी और मेरा लंड चूसने लगी।
दोस्तो मुझे उस टाइम ऐसा महसूस हुआ कि जैसे मैं जन्नत में हूँ क्योंकि यह मेरा पहली बार था कि कोई लड़की मेरा लंड चूस रही थी.
और फिर मैं भी भाभी की चूत चाटने लगा। मैंने जैसे ही भाभी की चूत पर जुबान लगाई तो भाभी मचल गयी और भाभी की चूत पहले से ही गीली थी। हम दोनों 69 की पोज़िशन में थे, उधर भाभी मेरा लंड मुंह में लेकर चूस रही थी और मैं यहाँ भाभी की चूत चाट रहा था।
थोड़ी ही देर में मेरा तो माल निकल गया जो भाभी ने पूरा चूस लिया. और इधर भाभी की चूत ने भी अपना रस छोड़ दिया, मैंने भी भाभी का सारा रस पी लिया.
हम दोनों कुछ देर के लिए शांत लेट गए. लेकिन कुछ ही देर बाद मैंने भाभी के नंगे बदन को छेड़ना शुरू कर दिया. और फिर भाभी गर्म हो गयी, बोलने लगी- देवा… अब रहा नहीं जाता रे… डाल दे अपनी भाभी की चूत में अपना लंड।
फिर क्या था, भाभी ने मेरा लंड सहला कर फिर खड़ा कर दिया और मैंने भाभी को बिस्तर पर लेटा दिया, अपने लंड को भाभी की चूत पर रखा और अंदर डालने लगा तो लंड फिसल गया।
फिर मैंने थोड़ी क्रीम ली और भाभी की चूत और अपने लंड पर लगायी और लंड को भाभी की चूत पर सेट करके एक धक्का लगाया तो मेरा आधा लंड भाभी की चूत में घुस गया और भाभी की दर्द के मारे चीख निकल गयी.
वो कहने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… देवा, इसे निकाल दो… बहुत दर्द हो रहा है. निकाल ले अपने लंड को!
पर मैंने भाभी की एक बात ना सुनी और भाभी को किस करने लगा.
और फिर जब भाभी थोड़ी शांत हुई तो मैंने और एक ज़ोरदार शॉट मारा और पूरा लंड भाभी चूत में घुसेड़ दिया और फिर भाभी के मुख से चीख निकल गयी- उईईई ईईई मां री ईईईईई मर गयी रे मैं… निकाल ले देवा इसे… मेरे से इतना बड़ा लंड सहन नहीं हो रहा है.
भाभी की आँखों से आँसू बहाने लगे पर मैंने भाभी की एक ना सुनी और मैं थोड़ी देर रुका रहा और भाभी को किस करते रहा. फिर कुछ देर बाद भाभी को आराम मिला, भाभी ने नीचे से थोड़ा हिलना शुरू किया तो फिर मैं समझ गया कि अब भाभी का दर्द शांत हो गया है, फिर मैंने भाभी की चूत में धक्के पे धक्के लगाना शुरू किए और अब भाभी भी मेरा साथ देने लगी और अपनी गांड उठा उठा कर मजा लेने लगी.
हमारी ये धक्का पेल चुदाई लगभग 15 मिनट तक चली होगी, उस समय तक भाभी एक बार झड़ चुकी थी और अब मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और लगभग 15-20 शॉट के बाद मैं भी भाभी की चूत में झड़ गया.
और मैं फिर वैसे ही भाभी के ऊपर लेट गया.
थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे, हमने एक दूसरे के यौन अंगों को साफ किया और कपड़े पहनने लगे.
मैंने भाभी को अपनी बांहों में लेकर किस किया और खूब प्यार करके वहां से निकल गया. मुझे भाभी के चेहरे पर खुशी नज़र आ रही थी।
उसके कुछ दिन बाद भाभी फिर अपनी ससुराल में आ गई. तब भी हम दोनों चुदाई के मौके ढूँढते रहते थे और मौक़ा मिलते ही चूत चुदाई का मजा ले लेते थे.
मैं अब मुंबई में जॉब करने आ गया, लेकिन जब भी मैं घर जाता हूँ तो भाभी की चुत चुदाई का कुछ ना कुछ मौका निकाल कर चोदन कर ही लेता हूँ।

माँ बेटा सेक्स: बेटे ने मेरी हवस मिटाई


प्रिय पाठको, मेरी कहानी माँ बेटा सेक्स की है, मेरा नाम प्रभा है, मैं 37 साल की विधवा हूँ. मेरे 2 बच्चे है, एक बेटा सोनू 19 साल का और बेटी शिवानी उससे छोटी है.
करीब एक साल से मैं अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ रही हूँ. और यकीन मानिये यहाँ की कहानियाँ बेहद गर्म होती हैं!
काफी दिनों बाद आज मैंने सोचा कि अभी 20 दिन पुरानी घटना को कहानी के माध्यम से आप लोगों के साथ शेयर करूँ!
तो दोस्तो, आज मैं आपको एकदम सच्ची घटना बताने जा रही हूँ जिसमें मैं और बेटा बेटा सोनू है!
मेरे पिताजी को दारू की लत थी, माँ बचपन में ही चल बसी थी तो मेरे पिताजी ने मेरी शादी किशोरावस्था में ही करवा दी. कुछ साल अच्छे से बीते, सोनू और शिवानी का जन्म हुआ और फिर एक रोज़ मेरे पति का एक एक्सीडेंट के वजह से देहांत हो गया करीब 4 साल पहले!
मैं पूरी तरह टूट चुकी थी लेकिन ससुराल के लोगों ने बहुत मदद की और मैंने एक दुकान खोल ली जिससे हमारा गुजारा अच्छे से चलने लगा.
सब ठीक से चल रहा था लेकिन हर औरत और मर्द की कुछ बुनियादी शारीरिक जरूरतें होती हैं, वहां पर आकर मैं बेबस हो जाती थी, बाहर किसी से सम्बन्ध क्या रिश्ता रखने में भी बदनामी का डर सताता था तो इसी बेबसी को अपनी किस्मत मानकर जीवन काट रही रही थी!
अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ती थी, पोर्न वीडियो देखती थी और उंगली से ही चुत की आग मिटाती थी … लेकिन आखिर कितने दिन?
खैर मैंने दिमाग से ये ख्याल ही उतार दिया था लेकिन करीब एक महीने पहले कुछ ऐसा घटा कि मेरी लालसा बढ़ गयी!
एक रोज़ शिवानी स्कूल गयी थी और मेरा बेटा घर पर ही था, मैं दूकान से जब दोपहर को घर आयी खाना बनाने तो एक चाभी जो मेरे पास रहती थी उससे मैंने दरवाजा खोला और अंदर गयी. अंदर सोनू के कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था और वो बिस्तर पे सिर्फ अंडरवियर पहन के लेटा था और अंडरवियर के ऊपर से ही उसका लौड़ा लम्बा मोटा और सख्त है, यह मुझे महसूस हो गया था.
लेकिन आखिर है तो मेरा बेटा … यह सोचकर मैं अंदर चली गयी और खाना बनाकर सीधा बेड पे लेट गयी.
मेरे ख्याल में अब भी वही चल रहा था, मैं चाह कर भी खुद को रोक नहीं पा रही थी.
फिर मैंने अन्तर्वासना की साइट से माँ की चुदाई श्रेणी से माँ बेटा सेक्स कहानियाँ पढ़नी शुरू कर दी, यकीन मानिये … पढ़ने के बाद मैं खुद के काबू में नहीं रही, मैंने उंगली से अपनी चुत को छुआ तो वो पानी पानी हो चुकी थी.
मैंने उस रोज रात में न खाना बनाया न खाया … मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी … मुझे बस चुदना था अब!
उन कहानियों से मैंने सीखा कि कोई भी रिश्ता हो लेकिन असल रिश्ता सिर्फ एक औरत और मर्द का होता है फिर वो चाहे बेटा हो या देवर!
रात के करीब 12 बज रहे थे, मैंने बहुत सारी पोर्न वीडियो देखी एवं हिंदी सेक्स कहानी पढ़ कर धीरे धीरे मैंने उंगली करनी शुरू कर दी अपनी चुत में … मेरा जोश एकदम बर्दाश्त के बाहर हो रहा था, जी कर रहा था कोई भी मर्द आकर मेरे जिस्म को नोच के खा जाए!
तभी एकाएक सोनू आकर सीधा चढ़ गया मुझ पर … वो भी पूरा नंगा!
मैं अचानक हुए इस हमले से भौचक्की रह गयी और हड़बड़ा कर उसे दूसरी तरफ धकेला और खड़ी हो कर अपनी साड़ी ठीक करने लगी!
इतने में सोनू ने मुझे कस के पकड़ कर बिस्तर पे लिटा दिया और बोला- साली कब से उंगली कर रही है … तुझे तो उंगली करते हुए मैं रोज़ ही देखता हूँ और नंगी नहाती है तब भी दरवाज़े के छेद से तुझे देखता हूँ. माँ-बेटे का रिश्ता भूल कर सिर्फ अपनी हवस मिटा माँ! क्यूंकि मैंने भी आज तक सिर्फ मुठ ही मारी है! आ जा मेरी जान … आज तेरे जिस्म की आग मिटाता हूँ मैं! मुझे अपना बेटा नहीं, अपना पति समझ आज की रात! तुझे दिखाने के लिए ही अंडरवियर में लेटा था!
इतना कहकर सोनू मुझे चूमने लगा और मेरे बूब्स दबाने लगा.
अब मैंने शर्म हया सब त्याग दी, मेरा कण्ट्रोल खुद पे नहीं रहा था, बस अब सामने एक हट्टा कट्टा मर्द दिख रहा था जिसका लौड़ा उसके बाप से भी लम्बा था. मुझे अब अपनी प्यास बुझानी थी और सोनू भी हवसी हो चुका था!
मुझे बचपन से ही ज्यादा जोश आया करता था और मुझे वाइल्ड सेक्स बहुत पसंद है जिससे कि कोई मेरा बदन नोच के खाये!
मैंने कहा- सोनू बेटा, मुझे एक रांड समझ और जो दिल में आये वो कर … मुझे मार, गाली दे, जो मन करे वो कर … बस मेरी आग मिटा मेरे बेटे!
यह सुनकर सोनू ने मेरी ब्लाउज को आगे से खींच कर फाड़ दिया और ब्रा को खोलकर मेरे निप्पल चूसने लगा और बूब्स मसलने लगा.
सोनू- साली रांड … तुझे अब मैं सही में रांड बनाऊंगा आज चोद के … कितना चुदवा सकती है तू सच सच बता?
प्रभा- बेटा, मैं तो दस मर्दों से भी चुदवा लूं, इतना भयानक जोश चढ़ा हुआ है मुझे!
इतना सुनते ही सोनू ने मेरी गांड मसल दी और कहा- साली कुतिया, बदन तो एकदम कसा हुआ है तेरा, सिसकारी जोर जोर से ले मम्मी, मैं चाहता हूँ कि पूरा मोहल्ला आज जान जाए कि तू चुद रही है!
इतना कहकर सोनू ने मेरी साड़ी पूरी खोल दी और पेटीकोट का नाड़ा खोल कर मुझे नंगी कर दिया, सिर्फ पैंटी बची थी जिसने मेरी गीली चूत को ढक रखा था!
फिर मेरे बेटे ने मुझे बेड पे लिटाया और मेरे पूरे बदन को चूमने लग गया एकदम हवसी के जैसे … आखिर पहली बार उसे नंगी औरत मिल रही थी चोदने को!
अब सोनू ने अपनी माँ की दोनों जांघों को चूमा और जांघें फैला कर पैंटी के ऊपर से ही मेरी चुत को चाटने लगा. मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैंने सोनू से कहा- बेटा, अपनी माँ की पैंटी उतार के चाट जीभ घुसा के मेरी चुत में!
सोनू ने अपने दांतों से मेरी पैंटी खींच कर उतारी और जैसे ही उसने जीभ मेरी चुत पे लगायी, मेरी हालत ख़राब हो गयी और मैं चिल्ला उठी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… अहहाह!
मेरी सिसकारी इतनी जोर से निकली कि आवाज सुनते ही आधी नींद में मेरी बेटी शिवानी मेरे कमरे में आ गयी और बोली- क्या हुआ मम्मी?
हम दोनों माँ बेटे अपने काम में लगे हुए थे!
मैंने कहा- कुछ नहीं बेटी, तुम जाओ सो जाओ!
शिवानी- मम्मी, भैया क्या कर रहा है आपके साथ? कपड़े भी नहीं पहने हैं उसने!
मैं- बेटा, वो मुझे प्यार कर रहा है, तुम और बड़ी हो जाओगी, तब तुम भी समझ जाओगी!
शिवानी- मम्मी, मुझे अकेले डर लग रहा था, मैं यहीं तुम्हारे बगल में सो जाऊँ?
अब मैं बड़ी मुसीबत में फंस गयी और न चाहते हुए भी शिवानी को अपने पलंग पर सुला लिया मैंने!
इधर सोनू ने मेरी चुत में अपनी जीभ पूरी पेल रखी थी, चुत से झरने की तरह पानी निकल रहा था!
मैंने कहा – सोनू बेटा, अब चोद मुझे … लौड़ा घुसा अपना अपनी मम्मी की चूत में!
इस पर सोनू ने कहा- साली कंडोम नहीं है, ऐसे ही चोदूँ, चलेगा न?
मुझे लौड़ा जल्द से जल्द अपनी चुत में महसूस करना था तो मैंने कहा- कर न साले, सोच क्या रहा है, कंडोम नहीं है तो उसके बिना चोद!
सोनू- मम्मी, मैं पहले तुम्हारी गांड मारूंगा! कुतिया अपनी गांड देखी है तूने कभी? एकदम गोरी गोरी मोटी फूली हुई है!
मैं गांड मरवाने की शौक़ीन रही हूँ तो मैं तुरंत कुतिया बन गयी और कहा- ले बेटा, मार अपनी माँ की गांड जी भर के!
अब सोनू ने पीछे से मेरी गांड अपना लौड़ा घुसना शुरू किया,इतने सालों बाद लौड़ा घुस रहा था तो मैं होश में थी ही नहीं बिल्कुल,धीरे धीरे कर के उसने अपना पूरा मोटा मुसल जैसा लन्ड मेरी गांड में पेल दिया और मेरे बाल पकड़ के मेरी गांड मरने लगा!
वो पहली बार चोद रहा था तो थोड़ा धीरे धीरे चोद रहा था तो मैंने कहा- बेटा कस कस के मार, इतने आराम से गांड और चुत नहीं मारी जाती है! कस के एकदम रांड समझ के पेल मुझे!
अब सोनू जोश से भर गया और मेरी पीठ पे थप्पड़ मारते हुए मेरे बाल खींच कर मेरी गांड मार रहा था. मैं एकदम भयानक जोश में आ चुकी थी! वासना मेरे सर चढ़ कर बोल रही थी.
तभी शिवानी बोली- भैया, मम्मी को क्यों मार रहे हो? उन्हें दर्द हो रहा है!
सोनू- अरे बहन, प्यार करने का यह एक तरीका होता है, तू बड़ी होगी तो समझ जाएगी!
मैंने कहा- शिवानी बेटा, तुम आंखें बंद कर के सो जाओ, भैया को प्यार करने दो मुझे!
अब सोनू मेरी गांड पर भी थप्पड़ मार रहा था जिससे मेरा जोश और बढ़ता जा रहा था. सोनू ने कहा- साली, तेरी गोरी गांड लाल हो चुकी है मेरे थप्पड़ों से और पीठ भी … अब तेरा बेटा अपनी माँ की चुत का मज़ा लेना चाहता है!
मैंने तुरंत कहा- हाँ बेटा, ले न जितना मज़ा लेना है ले! और अब से जब तेरा दिल करे तब मज़े लेना मेरे बदन का!
इतना कहकर मैं सीधी होकर लेट गयी और सोनू मेरी टांगें उठा कर मेरे ऊपर लेट गया और धीरे धीरे अपना लौड़ा मेरी चुत में घुसाने लगा!
सालों बाद मेरी चुत में लौड़ा घुस रहा था, मेरी चूत पानी से लबालब हो चुकी थी.
पूरा लौड़ा घुसाने के बाद जब सोनू ने चोदना शुरू किया तो मैं सातवे आस्मां की मस्ती पर थी, पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ हो रही थी और मेरी सिसकारियाँ गूँज रही थी!
सोनू- ले साली, और कस के चुद तू आज, आज तेरे इस कामुक बदन की आग बुझा ही दूंगा!
मैं- हरामी साले, ये आग सालों की है, इतनी जल्दी नहीं मिटेगी. और कस के दम लगा कर चोद मुझे! साले इतना मोटा मुसल जैसा लौड़ा है तेरा कि लग रहा है कि स्वर्ग में हूँ मैं! और चोद बेटा और कस कस के चोद अपनी मम्मी को!
सोनू- ले साली रांड मां मेरी … और कस कस के ले!
सोनू बहुत बुरी तरह से जानवर जैसे मेरे बदन को नोच रहा था और मुझे वो बहुत ही ज्यादा पसंद आ रहा था! जी कर रहा था आज चुदवा चुदवा के मर ही जाऊँ!
काफी देर तक मेरी चुत चोदने के बाद सोनू ने कहा- मम्मी, मेरा गिरने वाला है अंदर ही!
और मैं इतने जोश में थी कि कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी. उसका इतना बोलना था कि मैं परमानन्द को प्राप्त हुई, अपने शिखर पर पहुँच कर मेरा माल गिर गया और ओर्गास्म के साथ ही मैं मछली जैसे छटपटाने लगी. जिसे सोनू समझ गया और मेरी यह हालत देख कर जोश में सोनू का भी गिर गया.
मुझे मालूम था कि मेरे सेफ सुरक्षित दिन चल रहे हैं तो निश्चिंत होकर मैंने अपने अंदर ही गिरवा लिया और मेरा सगा बेटा सोनू मेरे ऊपर ही यानि अपनी सगी नंगी मां के ऊपर लेट गया!
करीब दस मिनट बाद सोनू उठा और चुपचाप अपने कमरे में चला गया!
मैंने उठ कर अलमारी से नाइटी निकाल कर पहनी और लेट गयी.
तभी शिवानी उठ कर बैठ गयी और बोली- मम्मी, भैया ने आपको बहुत प्यार किया न?
मैंने- हाँ बेटी, बहुत ज्यादा खुश कर दिया है, चलो अब सो जाओ तुम भी!
मेरे मन में शक पैदा हो चुका था कि शायद शिवानी सब समझ चुकी है क्यूंकि अब वो कोई बच्ची तो रह नहीं गयी, पूरी जवान हो चुकी है!
खैर इस बारे में फिर न शिवानी ने कुछ कहा, न ही मैंने!
और फिर हम दोनों मां बेटी भी सो गए!
सुबह पांच बजे सोनू ने दुबारा से आकर मेरे जिस्म को नोचा और जमकर अपनी माँ को चोदा पर इस बार उसका माल मैंने अपने मुँह में लेकर पी लिया था!
अब मुझे एक मर्द और मेरे बेटे को जवान औरत मिल चुकी थी और इस तरह से हम अपनी शारीरिक जरूरत यानी कामवासना पूरा करते हैं!

बुआ की बेटी ने अपना बनाया


नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रोहित प्रकाश है और मैं जोधपुर राजस्थान से हूं। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मेरी उम्र 24 साल है, मैं फिलहाल दिल्ली में नौकरी कर रहा हूँ। ये कहानी है मेरी जिंदगी में आई उस परी की है जिसने मुझे चुदाई की अनोखी दुनिया में प्रवेश दिलाया।
मैं जहां पर नौकरी करता हूँ वहीं से कुछ दूरी पर मेरी एक बुआ रहती हैं तो इस वजह से मेरा उनके यहां आना जाना बना रहता था। बुआ की दो लड़कियां हैं, बड़ी नेहा जो 23 साल की है और छोटी नूतन 19 साल की है। वैसे तो दोनों जबरदस्त माल हैं लेकिन नूतन की शारीरिक बनावट कमाल की है, उसके स्तनों का अतिरिक्त उभार और गांड की मांसलता उसके यौवन को चार चांद लगाती है।
नौकरी के लिए दिल्ली आने पर मैं बुआ के यहां जब मैं पहली बार गया था तब से मेरी आकांक्षाओं में एक नाम नूतन का भी जुड़ चुका था। मुझे याद है उसे पहली बार देखने के बाद अपने कमरे पर जाकर मैंने उसके नाम और रूप की कई मुट्ठ मारी थी। लेकिन पता नहीं क्यों मैं उससे ठीक से बात नहीं कर पाता था और उसके सामने जाकर शर्माने लगता था।
लेकिन छः महीने पहले एक दिन रात को अचानक नूतन का फ़ोन आया, बोली- भैया, मम्मी और दीदी एक शादी में गए हैं, कल दोपहर तक आएंगे, मुझे बहुत डर लग रहा है, मैंने मम्मी को फोन करके बताया तो उन्होंने कहा रोहित भैया को बुला लो।
मेरी तो जैसे किस्मत ही खुल गयी हो, मैं बहुत खुश हो गया, मैंने उससे कहा- डरो मत नूतन, मैं तुम्हारे घर आ रहा हूँ बस 20 मिनट में।
मैं जल्दी से तैयार हुआ और बाहर से रिक्शा करके निकल पड़ा। बाहर निकलते ही मुझे एक मेडिकल स्टोर दिखा और मैंने रिक्शे वाले को रोककर स्टोर से मैनफोर्स का एक पैकेट ले लिया यह सोच कर कि शायद इसे इस्तेमाल करने का अवसर ही प्राप्त हो जाए!
मैं जैसे ही बुआ के घर पहुँचा तो मेरी बहन नूतन दरवाजे के पास ही मेरा इंतज़ार कर रही थी।
मैंने मजाक मजाक में उसके दोनों कन्धों को पकड़ते हुए नूतन को डांट पिलाते हुए कहा- क्या यार, इतनी डरपोक हो तुम?
उसने कहा- भैया, अब से पहले मैं रात को अकेले कभी नहीं रही हूं इसलिए डर रही थी।
फिर मैंने पूछा- तुमने खाना वाना भी खाया या नहीं?
तो उसने बोला- नहीं भैया, खाना मैंने बनाया ही नहीं!
फिर मैं बाहर जाकर होटल से बटर चिकन पैक करवा कर वापस आया।
तो उसने देखते ही बोला- भाई, तुझे कैसे पता कि मेरा फेवरेट बटर चिकन है।
तो फिर मैंने कहा- मुझे सब पता है, चल जल्दी खा ले… बकवास न कर!
इसके बाद मैं टीवी देखने दूसरे रूम में चला गया। रात के 10 बजे थे और मैं मन ही मन में न जाने कितनी बार उसे चोदने का ख्याल किये बैठा था।
कुछ देर बाद नूतन खाना खा कर मेरे पास आयी. मैं तो उसे देखकर बिल्कुल अवाक रह गया, उसने ब्लैक टॉप के नीचे लोअर पहन लिया था। उसकी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही बड़ी लगने लगी थीं इस ड्रेस में।
वो सोफे पर बेपरवाह बैठ गयी और मुझसे पूछने लगी- भाई, ये बता तू इतना मुझसे शर्माता क्यूँ है? क्या मैं सुंदर नहीं हूं?
मैंने अपने आप को हिम्मत देते हुए कहा- नहीं रे पागल, वो तो ऐसे ही है। तू बहुत सुंदर है और मुझे बहुत अच्छी लगती है लेकिन तू आखिर में है तो मेरी बहन ही।
इतने में मैंने नूतन से पूछा- और तू तो बता कि मैं तुझे कैसा लगता हूँ?
तो वो बोली- क्या भैया, तुम तो मेरे हीरो हो! तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो!
इतना कहते ही वो मेरे और पास आई और मुझे गले लगा लिया।
मैं न जाने किस दुनिया में था… पहली बार किसी लड़की ने मुझे हग किया था।
अब मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने भी अपनी बहन को अपनी बांहों में समेट लिया और दोनों हाथों से उसकी पीठ को सहलाने लगा। फिर मैंने उसके कान के पास एक चुम्बन लिया और वो मदहोश होने लगी।
फिर क्या था… हमारे होंठ आपस में मिले और हम बहुत देर तक एक दूसरे के होठों को जीभ से चूमते रहे। अब हम किसी पेशेवर प्रेमी की तरह लग रहे थे फिर मैंने उसकी टॉप को पीछे की तरफ से धीरे धीरे ऊपर की ओर उतारने लगा उसने भी साथ देते हुए मेरी शर्ट के बटन खोल दिये।
उसने ग्रे रंग की ब्रा और काले रंग की पैंटी पहनी थी। फिर मैंने उसकी पीठ को चूमते हुए उसकी ब्रा के हुक को खोला। अब वो कुछ एतराज कर रही थी मैंने समझाया- मैं कॉन्डोम लाया हूं, तू परेशान न हो।
फिर मैंने भी अपनी बनियान और अंडरवियर को उतार फेंका।
अब मैं बिल्कुल नंगा था और वो केवल पैंटी में थी। क्या मस्त माल थी दोस्तो, बिल्कुल किसी पोर्न अभिनेत्री की तरह।
मैंने अपने लंड को हाथ पर लेकर उसकी मुँह की तरफ बढ़ाया और उसने भी बेशर्मों की तरह मेरे लंड को मुँह में लेकर खूब चूसा।
फिर मैंने उसकी पैंटी को उतारा… ओहो क्या मस्त चूत थी? मैंने उसकी चूत पर उंगलियां फेरते हुए अपनी जीभ को अपनी बहन की चूत में धंसा दिया, अब वो मदमस्त होकर आहें भर रही थी।
ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था जैसे मैं उसके साथ पहली बार सेक्स कर रहा हूँ और उसकी चुदाई का तो मुझे पता नहीं जाने कितनों से चुदवाई होगी।
मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैंने तुरंत ही उसे अलग करके जीन्स की जेब से कॉन्डम निकाला और उसे अपने लंड पर लगा के नूतन को बिस्तर पर धक्का दे दिया। मेरी चचेरी बहन मेरे सामने बेशर्मों की भान्ति नंगी लेटी थी और जैसे इन्तजार कर रही थी कि कब मैं उसके नग्न तन पर आकर अपना अधिकार जमा लूं.
मैं समझ गया था ये लड़की पहले से ही खेली खाई है, खूब चुदी चुदाई है, चालू माल है इसलिए मैं बिस्तर पर आया, अपनी बहन के नंगे बदन पर लेट कर उसे पूरा ढक लिया और उसके होंठों पर होंठ रखा कर प्रगाढ़ चुम्बन करने लगा.
नीचे मैंने अपने पैरों का उपयोग करके उसे दोनों पैरों को बाहर की ओर सरकाना शुरू किया और धीरे धीरे मैंने उसकी जांघों के बीच में आ गया, मेरा लंड अब अपनी बहन की चूत के ऊपर था, मेरी बहन मेरे नीचे लेटी कसमसा रही थी, चाह रही थि कि मैं जल्दी से अपना लंड उसकी चूत में घुसा दूँ.
मैंने उसे आँखों से इशारा किया कि मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद में टिकाये. वो मेरा इशारा समझ गयी, उसने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर टिकाया और साथ ही नीचे से अपने चूतड़ उछल कर मुझे इशारा दिया कि मैंने धक्का मार कर लंड उसकी चूत में घुसा दूँ.
मैंने अपने चूतड़ों से एक झटका मारा और मेरा लंड बिना किसी रोक टोक के मेरी बहन की चूत में घुसता चला गया. मेरी बहन के मुख से आनन्द भरी एक चीख सी निकल गयी ‘ उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
मुझे भी अपनी बहना की गीली चूत मेरे लंड के इर्द गिर्द लिपटी हुयी महसूस हो रही थी. अब मैंने अपनी बहन को पूरा जोर मार के चोदना शुरू किया। मैंने करीब 15 मिनट तक उसको चोदता रहा हूँगा, कभी मैंने उसे घोड़ी बना कर चोदा तो कभी अपनी जांघों पर आमने सामने बिठा कर उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर चोदा।
वो भी जोर जोर से ऊँह आह किये जा रही थी।
अब हम अपने सेक्स अध्याय के समापन की तरफ बढ़ रहे थे। मैंने अंतिम झटका मार कर अपने वीर्य की नदी बहा दी लेकिन मुझे दुःख है कि वो नदी मेरी बहन की चूत के अंदर नहीं बही, वो नदी कंडोम में उलझ कर रह गयी.
और झड़ने के बाद मैंने अपनी बहन के होठों को चूम कर उससे कहा- आई लव यू नूतन… तुमने जो मुझे ये प्यार दिया, उसे मैं कभी नहीं भूलूंगा।
फिर हमने बाथरूम जाकर अपने आपको साफ किया और आकर एक दूसरे की बाहों में सो गए।
बीच रात में मेरी नींद खुली तो देखा कि मेरी बहन मेरे साथ पूरी नंगी सो रही थी, मेरे लंड ने फिर से अंगड़ाई ली और मैं अपनी बहन को एक बार फिर से चोदने को उतावला हो गया.
मैंने अपनी बहन को बिना जगाये उसके पैर दायें बायें सरका कर उसकी चूत को खोला और अपनी जीभ से चाटने लगा.
दो ही मिनट में मेरी बहन जाग गयी और उम्म आह करने लगी. वो बड़ा मजा लेकर अपनी चूत चटवा रही थी. उसके बाद मैं उसके ऊपर आया और अपने हाथ से लंड को चूत के द्वार पर टिका कर अंदर धकेल दिया और धकापेल चोदने लगा. मेरी बहन मेरे नीचे पड़ी चुद रही थी और सिसकारियां भर रही थी.
थोड़ी देर बाद जब मैं झड़ने को हुआ तो मुझे याद आया कि मैंने इस बार कंडोम तो लगाया ही नहीं.. लेकिन अब क्या हो सकता था, मैंने सोचा कि जो हो रहा है होने दो… अभी मैं अपना मजा क्यों खराब करूं!
मैंने अपना वीर्य अपनी बहन की चूत में ही छोड़ दिया और उसके ऊपर से हट कर उसकी बगल में लेट गया. शीघ्र ही मुझे नींद आ गयी.
सुबह उठा तो मैं नूतन को जगाया और अपने कमरे पर आ गया. लेकिन थकान की वजह से ऑफिस में बहाना करके छुट्टी ले ली।
दोपहर में नूतन का फ़ोन आया- भाई, मैं तेरे गेट के बाहर हूं, मम्मी और दी कल आएंगे क्यूंकि उन्हें उन लोगों ने रोक लिया।
वो मेरे कमरे पर आई. उसी दोपहर मैंने उसे दो बार बिना कंडोम के चोदा और शाम को उसके घर गया और पूरी रात हमने मजे किये।
अगैल दिन मैंने उससे पूछा- यार, तुम बिना कंडोम के चुद रही हो? कुछ हो गया तो?
तो वो बोली- भैया, मैं आज ही दवाई ले लूंगी, कुछ नहीं होगा, आप चिंता मत करो!
पिछले छः महीनों में हम दोनों भाई बहन ने मौके पाकर बहुत बार चुदाई के मजे लिए।
अब मेरी शादी हो चुकी है पर मौके पर हम चुदाई कर लेते हैं।
अगले महीने उसकी भी शादी होने जा रही है।